तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
2020 के बाद 2021 में लगाये लाकडाउन के बाद क्षेत्र के होटल कारोबारियो की कमर तोड दी है। कोरोना वायरस व लॉकडाउन का असर भले ही मौजूदा हालात में आमजन पर पड़ रहा है लेकिन होटल व्यवसायी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। दोनों व्यवसायों पर आशंकाओं के बादल छा चुके हैं। जिसको छंटने में कई महिने से अधिक का समय लगेगा। हालात यही बने रहे तो कोरिया जिले में होटल, रेस्टोरेंट व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों की कमर टूट जाएगी। लेकिन बीते 11 तारिख से लगाये गये लॉकडाउन के बाद होटल, रेस्टोरेंट ही नहीं बल्कि अन्य व्यवसाय भी जमीन पर आ गए हैं। व्यापारियों की मानें तो अब उन्हें इससे उबरने में वक्त लगेगा। क्योकि अचानक लगे लाकडाउन के बाद वो अपने स्टोरो में रखे कच्चमाल व मिठाईयो जैसे कच्चे सामानो को क्या कर सकते थे जिस कारण लगभग सभी होटल व्यवसाईयो को 2 से 3 लाख तक के नुकसान की बात बताई जा रही है।
जिले में 200 अधिक होटल-रेस्टोरेंट-ढाबे
पिछले साल भी लॉकडाउन का सीधा असर होटल व रेस्टोरेंट व्यवसाय पर पड़ा था। वैसा ही हालत इस बार भी नजर आ रहे हैं। इस दौरान जिले भर में होटल-रेस्टोरेंट-ढाबो में काम करने वाले 2000 से अधिक कुक, वेटर ब्वाय, लोगो का भविष्य भी दांव पर लगा है।
क्या कहते है व्यवसाई

कोरोना वायरस और लॉकडाउन का सर्वाधिक असर होटल व्यवसाय पर पड़ा है। एक बार फिर से लाखो का सामना र्बबाद हो गया है। जैसे आसार दिख रहे हैं इससे उबरने में छह माह से ज्यादा समय लग जाएगा। पिछले बार भी हमारा 3 लाख का नुकसान हुआ था और इस बार भी 3 लाख से अधिक का ही नुकसान हुआ होगा।
गौरव प्रकाष , प्रो. बेक इन टाउन

लॉकडाउन का असर से खाने-पीने की वस्तु हो या आवश्यक वस्तुएं सबमें अधिक क्षति सामने आ रही है। लाकडाउन में हमारे होटल का 2 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। जिसकी भरपाई होना मुष्किल है। षासन को हमाी मदद भी करनी चाहिए।
गुल्लू सिंधी – प्रो. महामाया होटल

लाकडाउन के असर यह रहा कि होटल कारोबार पर ग्रहण लग गया है। 1 साल के अदंर दो बार 2-2 लाख से अधिक का नुकसान सहना पडा । जिस कारण हमारी कमर ही टूट गई है। इतनी आर्थिक छति को बर्दास्त करना हमारी क्षमता से बाहर है।
करण सिंह राजपुरोहित – प्रो. राज्यस्थानी स्वीटस

लाकडाउन के कारण होटल-रेस्टोरेंट के साथ हमारे ढाबे का व्यवसाय भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यदि यही हालत रहा तो हमें व्यवसाय बदलने पर मजबूर होना पडेगा।
देव नरायण भार्गव – ढाबा संचालक
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