162 एमआरपी की तेल 170 में रहे बेच, दुकानदार की मनमानी, प्रषासन मौन

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

लॉकडाउन में किराने के सामानों का कोई निश्चित भाव नहीं रह गया है। व्यापारी अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक बेच रहे हैं। इससे मुनाफाखोर सामानों को बेचकर खूब कमाई कर रहे हैं। प्रशासन के तमाम एलर्ट रहने के बाद भी 162 रु एमआरपी के कलष ब्रांड का सरसो तेल 1 लीटर को बैकुन्ठपुर के किराना व्यापारियो के द्धारा 170 रु में बेच रहे हैं। इस बार प्रषासन ने किराना का कोई रेट लिस्ट जारी नही होने के कारण किराना दुकानदार लोगो की मजबूरियो का फायदा उठा रहे हैं।
बाजार में अधिकतर लोग खुदरा में सामान खरीदते हैं। ऐसे में दुकानदार अब सभी सामानों को मनमर्जी से बेच रहे हैं। साथ ही खूब मुनाफाखोरी करने में जुटे हैं। जब उनसे कोई शिकायत करता है तो वह सीधा कहते हैं कि जाओ षिकयत कर दो। ऐसे में लोग परेशान हो चुके हैं। वहीं लोग लॉकडाउन को कोसने लगे हैं।

दस से पंद्रह रुपये हर वस्तु पर बढ़े
व्यापारियों का कहना है कि बाहर से माल नहीं आ रहा है। दुकानदार आपस में ही एक-दूसरे के यहां से माल मंगाकर बेच रहे हैं, इससे हर वस्तु पर दस से पंद्रह रुपये की तेजी आई है। यदि प्रशासन मांग की आपूर्ति कराए तो रेटों में अंतर आ सकता है।

दालों का कोई रेट नहीं
बाजार में दालों का कोई रेट नहीं है। सर्वाधिक खपत अरहर, उड़द और मसूर की डिमांड है। बाजार में अरहर की दाल कहीं 90 रुपये किलो तो कहीं सौ और 120 रुपये तक में बिक रही है, जबकि पैकेट बंद दाल 120 से लेकर 130 रुपये किलो तक बिक रही है। यही हाल मसूर और उड़द की दाल का है। यह 80 रुपये से लेकर 130 रुपये तक बाजार में खुलेआम बेची जा रही है।

अधिकतर सामान एमआरपी पर
खाद्य वस्तुओं के दाम कंपनी निर्धारित करती है। सामान्य दिनों में यह वस्तुएं अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से दस से पंद्रह प्रतिशत कम रेट पर मिल जाती हैं, लेकिन लॉकडाउन में दुकानदार एमआरपी पर ही सामान बेच रहे हैं। इससे वे 20 से 25 प्रतिशत पहले ही मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे में दुकानदार अब उसी एमआरपी पर सामान बेचकर खूब मुनाफाखोरी कर रहे हैं।

खुदरा बाजार में रेट
चीनी 40, अरहर 100, 110, मूंग की दाल 100, उड़द की दाल 90, मसूर 85, चना की दाल 70, काबूली चना 110, चावल 40 से 90 रुपये।

पैकेट बंद के रेट
चीनी 45, अरहर 120, उड़द की दाल 130, मसूर की दाल 80, चना की दाल 80, काबूली चना 100, चावल 300 से 550 रुपये प्रति 10किलो पैकेट

अब आनलाइन खरीदी रहेगी प्राथमिकता
पूरे जिले में लाकडाउन है। किराना की दुकाने बंद है। दुकानदारों को केवल घर पहुंच सेवा की छूट दी गई है। संकट है इस वजह से मुनाफाखोरी शुरू हो गई है। इससे नाराज लोगों का कहना है कि अभी मजबूरी का फायदा उठाकर दुकानदार कमा ले लेकिन आगे से हम आनलाइन खरीदी करेगें। जिलों में किस्तों में लाकडाउन चल रहा है। अब आनलाइन डिलीवरी की छूट मिली तो खाद्य सामग्रियों खासकर तेल और दाल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई। चर्चा है कि कुछ बड़े व्यापारियों की मुनाफाखोरी के कारण सामानों की कीमत बढ़ी। इसे लेकर अब आम लोगों में इसे लेकर आक्रोश पनपने लगा है। लोगो का कहना है कि संकट के दौर में जितनी मुनाफाखोरी करनी है, कर लें। फिर जब हम आनलाइन खरीदारी करेंगे ।

स्वास्थ्य से रसोई तक का बजट बिगड़ा
फल और सब्जी के जरिए डाक्टर मरीजों को शारीरिक क्षमता बढाने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन यहां विक्रेताओं ने अंधेरगर्दी मचा रखी है। जबकि प्रशासन द्वारा ऐसे मुनाफाखोरों पर नजर नही रखी जा रही है। लाकडाउन के बीच बढती मंहगाई को लेकर प्रशासन द्वारा मानिटरिंग भी नहीं की जा रही है। पिछले साल लाकडाउन के दौरान प्रशासन द्वारा सब्जियों के दाम निर्धारित कर दिए थे, लेकिन इस बार प्रशासन द्वारा कोई पहल नहीं किए जाने का फायदा फुटकर विक्रेता जमकर उठा रहे हैं। हालात यह है कि सब्जी, फल और किराना व्यापारी तक महंगे सामान बेचने से गुरेज नही कर रहे है।
कोरोना काल के चलते सब्जियों से लेकर फल के दाम भी आसमान छूने लगे है। अब ऐसी स्थिति में कोई सब्जी खाए या स्वास्थ्य बनाने फल का सहारा ले, क्योकि दोनों ही कर पाना ऐसे परिवार के लिए संभव नही हो पा रहा है। जो आर्थिक रूप से मजबूत नहीं है। अब कही कोई बीमार व्यक्ति फल खाने की चाह रखता है। तो उसके घर में रसोई के अन्य बजट को पूरा लाकडाउन करना पड़ेगा। तब कहीं जाकर उसे यह फल नसीब हो सकेगा। कहने को तो शहर में सैकडो किराना दुकान है, लेकिन जैसे-जैसे लाकडाउन के दिन बढते जा रहे हैं। राशन नहीं होने का रोना रोकर कई दुकान अब सामाग्रीयों के दाम बढाने से पीछे नही हट रहे है। कई किराना दुकान वाले चोरी छिपे सामान बेच तो रहे हैं लेकिन लोगों से ज्यादा कीमत वसूल कर रहे हैं। प्रशासन ने घर-घर जाकर फेरी लगाकर सब्जी बेचने की छूट दी थी लेकिन सब्जी के साथ ही विक्रेता आलू और प्याज भी बेच रहे हैं। आलू और प्याज के थोक व्यापारियों से ले रहे हैं और ऐसी जानकारी मिली है कि वे सुबह-सुबह अपनी दुकान खोल कर इसे चिह्लर विक्रेताओं को बेच रहे हैं।

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