तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
न्यू लाईफ हेल्थ एण्ड एजुकेषन सोसायटी द्वारा संचालित न्यू लाईफ इंस्टीट्यूट आॅफ नर्सिंग में नर्सिंग फैकल्टी द्वारा विष्व थैलेसीमिया दिवस पर आॅनलाइन कार्यषाला आयोजित किया गया। इस वर्ष विष्व थैलेसीमिया दिवस का थिम एड्रेसिंग हेल्थ इन इनक्वाॅलिटीज एक्रोस द ग्लोबल थैलेसीमिया कम्युनिटी को ध्यान में रखकर कैसे हमंे लोगों को जागरूक करना है यह बताया गया। थैलेसीमिया माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर बच्चों को होने वाल रक्त संक्रमित रोग है। थैलेसीमिया में हीमोग्लोबिन के निर्माण की प्रक्रिया अनियमित हो जाती है और रोगी बच्चे के शरीर में रक्त की भारी कमी होने लगती है, जिसके कारण रोगी को बार-बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। थैलेसीमिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये प्रतिवर्ष 8 मई को अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है।
सामान्यतः लाल रक्त कोशिकाओं की आयु 120 दिनों की होती है लेकिन थैलेसीमिया के कारण यह आयु घटकर 20 दिन रह जाती है, जिसका सीधा प्रभाव हीमोग्लोबिन पर पड़ता है, हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाने से शरीर कमजोर हो जाता है, रोगी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, परिणाम स्वरूप व्यक्ति को कोई न कोई बीमारी घेर लेती है, यह एक आनुवंशिक बीमारी है, माता -पिता इसके वाहक होते हैं। थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है- अल्फा थैलेसीमिया व बीटा थैलेसीमिया। थैलेसीमिया से ग्रसित माता – पिता के जीन में माइनर थैलेसीमिया होता है, तो होने वाले बच्चे में मेजर थैलेसिमिया बीमारी हो सकती है, यह काफी घातक है परन्तु माता- पिता में से किसी एक के माइनर थैलेसीमिया होने पर होने वाले बच्चे को खतरा नहीं होता। यदि माता-पिता दोनों को माइनर थैलेसीमिया रोग है, तब होने वाले बच्चे को यह रोग होने के आशंका 25 प्रतिशत होती है।
विष्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों में लक्षण जन्म के बाद 4 से 6 महीने में नजर आते हैं, कुछ बच्चों में 5 से 10 वर्ष में भी लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे- त्वचा, आंखें, जीभ और नाखून पीले पड़ना, दांतों के उगने में कठिनाई, बच्चों का विकास कम होना। थैलेसीमिया बीमारी की शुरुआती लक्षण जैसे- कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत और सांस फूलना है। थैलेसीमिया के उपचार में रक्त चढ़ाना एवं बोन मेरो ट्रांसप्लांट कराना जरूरी होता है, एवं थैलेसीमिया रोगी को पौष्टिक भोजन एवं व्यायाम नियंत्रित रखने में मदद करता है।
थैलेसीमिया रोग से बचने के उपाय-1. रक्त की जांच करवाकर रोग की पहचान करना। 2. शादी से पहले लड़के व लड़की के रक्त की जांच करवाना। 3.नजदीकी रिश्ते में विवाह करने से बचना। 4. गर्भधारण से 4 महीने के अन्दर भ्रुण की जाँच करवाना।
विष्व थैलेसीमिया दिवस के विषय में छात्र- छात्राओं को आॅनलाईन/वर्चुअल कार्यषाला के माध्यम से जानकारी उपलब्ध गया। इस पूरे आॅनलाईन/वर्चुअल कार्यषाला का आयोजन नर्सिंग ट्यूटर पूजा देवांगन के द्वारा, अतिथि डाॅ. प्रिंस जायसवाल, प्राचार्या एवं समस्त नर्सिंग फैकल्टी के उपस्थिती में किया गया।
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