तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
एक जमाना था जब बैकुन्ठपुर शहर में आधा दर्जन से ज्याद तेल मिलें थी और शहर में पेरे जाने वाला सरसों का तेल जिलों के कई हिस्सो में सप्लाई होता था। खाने का तेल महंगा होने के बाद लोगों को यह बातें याद आ रही हैं। शहर के पुराने लोग तेल की महंगाई पर चर्चा करते-करते लोग उन दिनों की यादों में गुम हो जाते हैं। एक समय था जब यहा की मिलो से तैयार होने वाले सरसों के तेल की झार से लोगों की आंखों में आंसू आ जाया करते थे और आज लगातार महंगा हो रहा तेल लोगों की आंखों में आंसू ला रहा है।
पहले क्षेत्र में अच्छी उपज थी सरसों की
आम अवधारणा है कि सरसों का तेल स्वास्थ्य के लिये लाभदायक और प्रतिरोधी गुणों से भरपूर माना जाता है। परंतु ज्यादा लागत और मेहनत, दाम कम होने तथा सरकारी प्रोत्साहन के आभाव मे किसानो ने सरसो की खेती ही बंद कर दी।
लगातार बढ़ रहे किमतो से लोग परेषान
विगत डेढ साल में कोरोना से आर्थिक रीड तोड चुके लोगों के लिये मंहगाई अब परेशानी का कारण बन गई है। बीते एक साल के अंदर पेट्रोल, डीजल के बाद अगर किसी चीज ने जनता को सबसे ज्यादा परेशान किया है तो वह है सोयाबीन और सरसों का तेल। इस दौरान इन दोनो के दाम 100 प्रतिशत तक बढ़ गये। पिछले तीन-चार दिनो में ही सोयाबीन और राई के तेल की कीमतों मे 15 से 20 रूपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। बाजार की पड़ताल से पता चला है कि बीते बुधवार को जिले मे जो सरसो का तेल 180 और सोयाबीन 155 रूपये प्रति लीटर बिक रहा था वह मंगलवार को सरसो का तेल बढ़ कर 190 से 200 रूपये हो गया। तो रिफाईन आयल भी 160 से उपर जा पहुॅचा है। इसी दरम्यिान अरहर दाल भी उछल कर 150 रूपये किलो हो गई, जिसके दाम 2 महिने पहले मात्र 90 रूपये थे। किराना व्यापारी बताते हैं कि ऐसा कोई हफ्ता नहीं है, जब खादय तेल के दाम न बढ़े हों।
व्यापारी भी हुए परेशान
खाद्य वस्तुओं की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। महामारी के कारण रोजगार खो चुके गरीब, मजदूर और विशेषकर मध्यम वर्ग के सामने तो जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है। वहीं मंहगाई से किराना व्यवसायी भी कम परेशान नहीं हैं। उनका कहना है कि दाम बढ़ने से उन्हे भी व्यापार मे ज्यादा पैसा लगाना पड़ता है। पहले वे अपने यहां 20 टीन तक तेल की स्टॉकिंग आराम से कर लेते थे, परंतु अब 2-3 टीन से ज्यादा की हिम्मत नहीं है। यही हाल ग्राहकों का है, पिछले दिनो तक जो लोग 10 या 5 लीटर कुकिंग आयल खरीद कर ले जाते थे, वे अब बमुश्किल किलो, आधा किलो और पाव तक आ गये हैं।
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