प्रेमचंद जयंती पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन

Estimated read time 1 min read

Baikunthpur @ Tahkikat News

प्रेमचंद जयंती के अवसर पर शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा किसान संकट और प्रेमचंद विषयक संगोष्ठी का आयोजन हुआ । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ प्रेमशंकर सिंह, सहायक प्राध्यापक दयालबाग एजुकेशनल इन्स्टीट्यूट तथा डॉ दीपशिखा सिंह, सहायक प्राध्यापक, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय थे। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ रंजना नीलिमा कच्छप ने अतिथियों का स्वागत किया तथा कहा कि प्रेमचंद का कथा साहित्य किसान जीवन का जीवंत दस्तावेज है ।
अपनी बात रखते हुए डॉ दीपशिखा ने कहा कि प्रेमचंद जिस किसान जीवन का चित्र अपनी कहानियों और उपन्यासों में खींचते हैं। उनकी एक परम्परा रही है और जो ‘मुंज‘ के काव्य से शुरू होती है और प्रेमचन्द के यहाँ मुखर स्वरूप पाती है। आगे उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य की एक महत्वपूर्ण विशेषता उनके स्त्री दृपात्र हैं जो कि बहुत सशक्त हैं। जिन्हें आज के किसान आन्दोलन में भी देखा जा सकता है । प्रेमचंद की धनिया, मुलिया, सिलिया या अन्य जो भी स्त्री-पात्र हैं वे हमारे समाज में हमेशा मौजूद रहे हैं और उन्हें आदर्श बनाते हुए ही स्त्री दृस्वतंत्रता की लड़ाई ज्यादा मजबूती से लड़ी जा सकती थी लेकिन हमारा दुर्भाग्य है कि हमने उन्हें किनारे कर दिया ।
डॉ प्रेमशंकर ने कहा कि प्रेमचंद के किसानों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे एक राजनीतिक चेतना से लैश हैं और यही बात उन्हें प्रतिरोध के लिए तैयार करती है । प्रेमचंद किसानों की ताकत को बहुत अच्छी तरह से समझा रहे थे और उन्हें अपने साहित्य में दर्ज कर रहे थे द्य इसके साथ ही प्रेमचंद सत्ता के स्वरूप को भी भलीभांति समझ रहे थे और उसे चलाने वाली पूंजीवादी ताकत तथा उनके अंतर्संबंध को भी स्पष्ट करने की कोशिश कर रहे थे ।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की समस्त छात्राओं तथा स्टाफ के साथ खड़गवाँ महाविद्यालय से डॉ दीपक सिंह, शत्रुघन सोनवानी, बी एच यू से डॉ सुशील सुमन अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली से डॉ मृत्युंजय त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे । कार्यक्रम का संचालन तथा धन्यवाद-ज्ञापन डॉ कामिनी ने किया।

as

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours