Baikunthpur @ Tahkikat News
आदिवासी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य शासन की योजनाओं में से एक देवगुड़ी विकास योजना से प्रदेश में गाँवों में स्थित आस्था के केंद्र एवं आराध्य देवी-देवता के प्रतीक देवगुड़ियों का संरक्षण सम्भव हुआ है। शासन की यह योजना देवगुड़ियों के कायाकल्प में महती भूमिका निभा रही है साथ ही राज्य की आस्था एवं संस्कृति को पुनर्जीवित कर रही है।
आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि कोरिया जिले में आदिवासी विकास विभाग द्वारा आदिवासी संस्कृति के परीक्षण एवं विकास अंतर्गत देवगुड़ी निर्माण एवं मरम्मत के लिए वर्ष 2019-20 में 10 लाख रुपये एवं वर्ष 2020-21 में 06 लाख रूपये की राशि से कुल 16 लाख रूपये से देवगुड़ी निर्माण एवं मरम्मत तथा चबूतरा निर्माण कार्य से जनजातीय संस्कृति को उसके मूलरूप में संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कोरिया जिले में ग्राम पंचायत कंजिया में गोंड जाति के लोगों के द्वारा आराध्य देवता ठाकुर बाबा की दीपावली के पश्चात आने वाली एकादशी को पूजा अर्चना की जाती है। जिसमें ग्रामीण मांदर और टिमकी जैसे जनजातीय वाद्य यंत्रों से भजन गाते हैं। युवाओं द्वारा शैला नृत्य भी किया जाता है। यह परंपरा अत्यंत प्राचीनतम है। इसे संजोये रखने के लिए विभाग द्वारा चबूतरा निर्माण कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को परंपरा निर्वाह एवं धार्मिक आयोजन में सुविधा हुई है। ग्राम पंचायत बड़वाही में बैगा जनजाति के आराध्य देवता घमसान बाबा के नाम से पटेलपारा बैगाबस्ती में देवगुड़ी स्थापित है। मान्यता है कि घमसान बाबा भगवान शिव के अंश है। प्रत्येक नवरात्रि में बैगा जनजाति द्वारा विशेष पूजा की जाती है। शासन की योजना के तहत देवगुड़ी के निकट निर्मित चबूतरा में सोमवार के दिन चौपाल लगाकर घमसान बाबा के विषय में चर्चा की जाती है जिसे शिव चर्चा नाम दिया गया है।
इसी तरह ग्राम पंचायत कुंवारी में बैगा जनजातियों की आराध्य देवी दुपदा दाई के नाम से सरई एवं महुआ के वृक्ष के पास देवगुड़ी स्थापित है। दशहरे के दिन इनकी पूजा की जाती है। दशहरे के पूर्व नवरात्रि में पण्डों द्वारा ज्वारा बोकर पारम्परिक रूप से पूजा अर्चना की जाती है ततपश्चात दशहरे के दिन जवारा चढ़ाने की परम्परा है।ग्रामीण युवा इस दिन शैला,करमा आदिवासी नृत्य एवं गायन करते है। आदिवासी विभाग द्वारा इस देवगुड़ी में चबूतरा निर्माण किया गया है। ग्रामवासी बताते है कि चबूतरा निर्माण से उन्हें पारम्परिक एवं सांस्कृतिक क्रियाकलापों के क्रियान्वयन में सुविधा मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि आदिवासी सांस्कृतिक दलों की सहायता योजना वर्ष 2020-21 के अंतर्गत 2 लाख 50 हजार रुपये से लोक कलाकारों की मदद भी की गई है।
as


+ There are no comments
Add yours