कुम्हारों के दिये, सीएम के आदेश के बाद जिले में टेक्स फ्री…….

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Baikunthpur @ Tahkikat News

दीपावली दीपों का पर्व है। इस त्योहार का अर्थ ही दीपों की कतार है। दीपावली पर दिए जलाने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। दीपों का महत्व बताया नहीं जा सकता। जहां दिए जलाना अंधेरे से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है, वहीं कुम्हार के लिए यह आजीविका का साधन है।
वर्तमान परिदृश्य में दीपावली मनाने के तरीकों में बदलाव आया है। दियों की जगह झालर और कृत्रिम लाइट ने ले ली है। प्लास्टिक से बने ये लाइट पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं। वहीं दिए जलाने से मौसमी कीड़े-मकोड़े नष्ट होते हैं और आकर्षक भी लगते हैं।


दीपावली पर दिए जलाने की परंपरा को प्रोत्साहित करने और कुम्हारों तथा दिए बनाने वाले ग्रामीणों की आय को बढ़ाने के मद्देनजर प्रदेष में मुख्यमंत्री के आदेष के बाद कोरिया कलेक्टर श्याम धावड़े ने जिले के कुम्हारों और ग्रामीणों द्वारा मिट्टी के दिए बनाये जाते हैं। इन्हीं दियों को बाज़ारों में विक्रय के लिए लाया जाता है। ये दिए ही उनके आजीविका का जरिया होते हैं। दियों की बिक्री से ही उनकी दीपावली रोशन होती है।


इसे ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने बेहद संवेदनशील निर्णय लेते हुए निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी अनुविभागीय दंडाधिकारी राजस्व, नगर निगम आयुक्त और नगरीय निकायों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मिट्टी के दिये विक्रय किये जाने के लिए आने वाले ग्रामीणों को किसी प्रकार की असुविधा ना हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाए। नगरीय क्षेत्रों में इससे किसी प्रकार की कर वसूली ना कि जाए। उन्होंने जिले के सभी लोगों से मिट्टी के दिए के उपयोग को प्रोत्साहित करने की भी अपील की है।

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