49 समूहो की 550 महिलाओ पर शासन का हथौडा, फरवरी से हो जायेंगे बेगार……….

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Baikunthpur @ Tahkikat News

शासन के एक आदेष से अचानक इस प्रकार के आदेश से स्व सहायता समूह की महिलाओं में हड़कंप मच गया है। हालांकि जिले के महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी का कहना है कि अभी आदेष स्थानिय स्तर तक नही आया हे शासन के आदेष के आने के बाद ही समूहो को जिले स्तर पर पत्र व्यवहार किया जायेगा। वही पर जैसे जैसे यह आदेष समूहो तक पहुॅच रहा है हड़कंप मचना स्वाभाविक है। गौरतलब हो कि कोरिया जिला में 49 महिला स्व सहायता समूह रेडी टू ईट का पोषण तैयार करते हैं और प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों पर समूह द्वारा पहुंचाया जाता है।


बताया जा रहा है कि रेडी टू ईट फूड निर्माण व वितरण का कार्य एक फरवरी 2022 से स्थानीय महिला स्व सहायता समूह के स्थान पर छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा स्थापित यूनिट के माध्यम से होगा। इस आशय महिला व बाल विकास सचिव रीना बाला साहेब कंगाले ने पत्र जारी किया है। जारी पत्र में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में प्रचलित पूरक पोषण आहार व्यवस्था अंतर्गत टेक होम राशन में रेडी टू ईट फूड निर्माण व वितरण का कार्य स्थानीय महिला स्व सहायता समूह के स्थान पर अब कृषि विकास व किसान कल्याण तथा जब प्रौद्योगिकी विभाग अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य बीज व कृषि विकास निगम द्वारा स्थापित यूनिट के माध्यम से होगा।


यह आदेश एक फरवरी 2022 से प्रभावशील होगा। पूर्व में इस संबंध में विभाग द्वारा समय-समय पर जारी समस्त निर्देशों को निरस्त किया जाता है। इस आदेश की कापी स्व सहायता समूह की महिलाओं तक भी पहुंच गई है। हालांकि समूह की कई महिलाओं से जब इस विषय पर चर्चा की गई तो उनका कहना था कि इसकी जानकारी अभी उनके पास आई है।

समूहो में मचा हड़कंप

अचानक इस प्रकार के आदेश से स्व सहायता समूह की महिलाओं में हड़कंप मच गया है। आदेश निचले स्तर पर पहुंचने लगा है। ऐसे में हड़कंप मचना स्वाभाविक है। कोरिया जिले में 49 महिला स्व सहायता समूह रेडी टू ईट का पोषण तैयार करते हैं और प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों पर समूह द्वारा पहुंचाया जाता है।

काम बंद होने से कर्ज में महिला समूह

कोरिया जिले में 49 स्व सहायता समूह की तकरीबन 550 महिलाएं रेडी टू ईट पोषण आहार का निर्माण सालों से करती आ रही है। इससे जीवन यापन के लिए उन्हें रोजगार मिला है। रेडी टू ईट निर्माण के लिए कहीं से भी शिकायत व आपत्ति नहीं है। महिलाओ का कहना है कि रेडी टू ईट निर्माण के लिए कर्ज कर व स्वयं की राशि लगाकर लाखों रुपये के मशीन लगाए है, जो काम बंद होने के बाद बेकार साबित होगा। समूह कर्ज में डूब जाएगा।

काम को यथावत रखा जाए

जिले के संचालित समूहो से जुड़ी महिलाओं ने शासन से मांग किया है कि पहले की तरह स्व-सहायता समूह की महिलाओं को रेडी टू ईट निर्माण बनाने के काम को यथावत रखा जाए। क्योंकि महिलाएं आंगनबाड़ियों में सफलतापूर्वक रेडी टू ईट का निर्माण कर वितरण कर रही है। सामग्रियों का मूल्य बाजार मूल्य से अधिक होने के बाद भी समूह घाटा सहन कर कार्य कर रही है।

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