क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है तकरीबन पूरा क्षेत्र ही शीतलहर की चपेट में है। ठंडी हवाओं ने लोगों का जीन मुहाल कर दिया है भीषण ठंड से दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कोरिया जिले में तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने पहले ही कड़ाके की सर्दी पड़ने का पूर्वानुमान जताया था। मौसम विभाग के विज्ञानियों का कहना है पर्वतीय राज्यों में लगातार हिमपात होने और ठंडी हवाओं के चलने का असर उत्तरी छत्तीसगढ में दिखने लगा है। मौसम विभाग ने आने वाले समय में मौसम के तेवर और तल्ख होने के आसार व्यक्त किए हैं।
कोरिया जिले में ठंड का आलम यह है कि आग के बिना रहना मुश्किल हो रहा है। उत्तर दिशा से आ रही सर्द हवाओं के चलते पूरे जिले समेत आस पास क्षेत्र में शीतलहर की चपेट में है। यहां कई जिलों में पारा 4 डिग्री तक लुढ़क गया। सोमवार को बैकुन्ठपुर में पारा 4 डिग्री तो रामगढ में पारा 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे आम जनजीवन पटरी से उतर गया है कई इलाकों में हल्के कोहरे का भी असर देखा गया।
तीन दिनों चल रही गलन भरी पछुओं हवाओं से न्यूनतम तापमान गिरकर 4.0 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। पारा गिरने से ठंड से लोगों को कंपा दिया है। अधिकतम व न्यूनतम पारे में गिरावट से जनजीवन बेहाल हो गया है। इसके बाद भी जिले में अभी अलाव नहीं जल सके हैं।
दिसंबर तीसरे पखवाडे शुरू होते ही जिले में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। रविवार की सुबह से चल रही बर्फीली पछुआ हवाओं से ठंड में और इजाफा हो गया है। सोमवार को दिन भर पछुआ हवाएं चलने से गलन भरी ठंड जारी रही। इसकी वजह से जिले का न्यूनतम पारा गिरकर 4.0 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। पारा गिरने से सर्दी ने लोगों को कंपा दिया है। इसके साथ ही अधिकतम तापमान में गिरावट से दिन की ठंड भी बढ़ गई है। अधिकतम तापमान 2 डिग्री कम होकर 21 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। तीनों दिनों से सर्दी बढ़ने से जनजीवन बेहाल हो गया है। आगामी 48 घंटे में मौसम शुष्क बना रहेगा। तेज पछुआ हवाएं चलने से तापमान में लगभग स्थिर रहेगा। सोमवार को पछुआ हवा की गति 2.8 किमी प्रति घंटा बताई जा रही है।
फसलो को बचाने धुंआ करने की सलाह
पिछले दो दिन से पड़ रही कड़ाके की ठंड ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। सोमवार की रात पड़ी कड़ाके की ठंड से न्यूनतम पारा 4 डिसे पर पहुंच गया था, जिससे ओस की परत जम गई और सब्जी की फसलों में बर्फ की चादर से एक गया। कृषि अधिकारी फसलों की सिंचाई करने की सलाह किसानों दे रहे हैं। सोमवार की सुबह जब लोग सैर पर निकले तो फसल, घास, पेड़, पौधों पर सफेद चादर नजर आई। ओस की परत हर तरफ थी। सब्जी की फसलों पर जमी ओस के कारण सफेद चादर सा लग रहा है। भाटा, टमाटर, आलू, गोभी की फसल पर शीत ज्यादा दिख रहा है। साथ ही रबी सीजन की उन फसलों पर खतरा मंडरा रहा है, जिनमें फूल और फलियां आ गए हैं। ठंड से फूल और फलियां खराब हो जाएगी। किसान फसलों को बचाने के लिए हल्की सिंचाई और धुआं कर रहे हैं।
बढे ठंड से जनजीवन थमा
सोमवार को भी दिनभर तेज धूप निकली रही, लेकिन ठंड का असर कम नहीं हुआ और शाम ढलते ही ठंड बढ़ गई थी। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव, हीटर का सहारा ले रहे हैं। अधिकतम तापमान 21 डिसे रहा और न्यूनतम तामपन 4 डिसे रहा। ठंड के कारण शाम होते ही बाजार में चहल-पहल कम हो जाती है और लोग घरों में दुबक जाते हैं। जरूरी काम से निकलने वाले लोग गर्म कपड़ों में ढके रहते हैं। कड़ाके की ठंड अभी कुछ दिन तक रहने की संभावना है। वहीं ठंड, कोहरे का असर ट्रेनों की रफ्तार भी पड़ रहा है।
शीतलहर से रहें सतर्क
विशेषज्ञ चिकित्सको के मुताबिक शीतलहर की स्थिति बनने पर बुजुर्ग और बच्चों को सबसे अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं घर से बाहर निकलने से पहले गमछे और गर्म कपड़े पहनें। बच्चे और बुजुर्ग सुबह-शाम घरों में ही रहें तो ज्यादा बेहतर होगा। दमा के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा हो सकती है। बच्चों और बुजुर्गों को ठंड में जुकाम, बुखार की चपेट में आ सकते हैं, इसलिए सभी सतर्क रहें।
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