कोरिया जिले के बैकुन्ठपुर और शिवपुर चरचा नगरिय निकायो में सपन्न हुए चुनाव के बाद कांग्रेसीयो के कहल से साफ नजर आ रहा है। जहॉ कांग्रेस को दोनो ही नगरिय निकायो में स्पष्ट बहुमत के बाद भी पार्टी का अधिकृत अध्यक्ष पर नाम घोषित कराने लॉबिंग तेजी हो गई है। जबकि विधायक सर्मथको का कहना है कि कोरिया विभाजन के बाद जिन परिश्थितियो में कांग्रेस के विरोधी माहौल में भी बैकुन्ठपुर और शिवपुर चरचा दोनो नगरिय निकायो में कांग्रेस को बहुमत दिलाने में कामयाब हुए।
वही पर पार्षदो में सर्वसम्मति न होने के कारण अब शहर में उनके सर्मथको के द्धारा कई तरह के ताल ठोकी जा रही किया है। दरअसल यहां अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सभापति के लिए कोई सर्वमान्य नेता नहीं है। बैकुन्ठपुर के बाद अब षिवपुर चरचा में भी कां्रगेस में कलह मचा हुआ है। जहा अब कांग्रेस के द्धारा स्थानिय विधायक और प्रभारी जोकि नगरिय प्रशासन मंत्री खुद शिव डहरिया हैं। आने वाले दिनो में इनके द्धारा किसी एक नाम पर सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है। और भी तय है इन्ही दोनो के द्धारा ही अतिंम निर्णय लिया जायेगा कि दोनो ही नगरिय निकायो में अध्यक्ष कौन बनेगा।
परिणाम के बाद पार्षद हुए लापता
पार्षदों के सामने विचित्र स्थिति आ गई है। जीतने के बाद कई पार्षद वार्ड तो क्या घर तक नहीं पहुंच पाए हैं। मतगणना स्थल से ही सीधे गायब कर दिए गए हैं। फोन पर बात करने की अनुमति सिर्फ घर वालों से है। जिस दल का बहुमत नहीं है वो पार्षद अकेले वार्ड में आभार प्रदर्शन करते घूम रहे हैं। इधर वार्ड के लोग हलाकान हो रहे हैं कि उनका पार्षद जीतने के बाद गायब कहा हो गया। लोग पार्षद को फोन लगा रहे हैं, पार्षदो के फोन स्विच आफ आ रहा है। बता दें कि 23 दिसंबर को चुनाव का रिजल्ट आ चुका है। रिजल्ट आने के बाद ही बहुमत दल के पार्षद अज्ञातवास पर रायपुर के बाद कई स्थानो पर जाने की खबरे आ रही है।
पर्यवेक्षकों को दी जिम्मेदारी
बैकुन्ठपुर तथा शिवपुर चरचा में कांग्रेस पूर्ण बहुमत में है। जहा परंतु पार्टी किसी तरह का विरोध नहीं चाहती। इसलिए आम सहमति बनाने तीनों निकायों में पर्यवेक्षक नियुक्त कर उन्हें जिम्मेदारी दे दी गई है। दोनों निकायो अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सभापति का भी चुनाव होगा। समन्वय बनाने के लिए पार्टी ने पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। पर्यवेक्षक संगठन को अपनी रिपोर्ट सौपेंगे। उसके बाद संगठन द्वारा तय किया जाएगा कि अध्यक्ष कौन बनेगा। सूत्रो की माने तो पर्यवेक्षको ने संगठन को अपनी रिर्पोट सौप दिया है ।
राजपत्र में प्रकाशित होने के 15 दिन बाद सदन
चुनाव संबंधित प्रक्रिया राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद आचार संहिता खत्म हो जाएगी। उसी दिन से पार्षदों का कार्यकाल शुरू माना जाएगा। पूरी व्यवस्था चुनाव आयोग से हटकर कलेक्टर के हाथ में आ जाएगी। राजपत्र में प्रकाशन के 15 दिन के भीतर सामान्य सभा कराना होगा। उसके एक सप्ताह बाद नपा परिषद का अनिवार्य होगा।
मुख्यमंत्री थपथपा चुके हैं पार्षदों की पीठ
चुनाव जीतने के बाद रायपुर में ठहराए गए जिलेे दोनो ही नगरिय निकायो के कांग्रेसी पार्षदों के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गत शनिवार को राजधानी के ही एक होटल में बैठक की। इस दौरान उन्होंने सभी को एकजुट होकर बेहतर काम करने कहा। इस दौरान चुनाव में उनके प्रदर्शन के लिए पीठ थपथपाते हुए सरीएम ने पार्षदों से कहा कि एकजुटता के साथ क्षेत्र का विकास करना है।
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