क्षेत्र में बस हादसे के बाद क्षेत्र में चल रहे कंडम बसो के परिचालन को लेकर अब बसों के खिलाफ जांच की मांग की जा रही है। क्षेत्र में चल रही बसो की फिटनेस, परमिट, बीमा सहित पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सहित अन्य दस्तावेजो की सघन जॉच की जरुरत महसूस की जा रही है। जिले के आरटीओ का कहना है कि जांच अभियान चलाया जा सकता है किन्तु हमारे पास पार्यप्त मात्रा में जवान नही है। षुक्रवार को एक बार फिर से एक स्कूल बस और फोर-व्हिलर के नागपुर के समीप हादसे के बाद बैकुन्ठपुर समेत क्षेत्र में चल रहे खटारा यात्री बसो को लेकर एक बार फिर से मांग उठने लगी है।
25 फीसद बसें हो चुकी पुरानी
बैकुन्ठपुर से संचालित करीब 25 फीसद बसें 15 से 20 साल पुरानी हो चुकी हैं। फिर भी बसों का संचालन किया जा रहा है। फिटनेस के नाम पर आरटीओ के जिम्मेदार सिर्फ औपचारिकता पूरी कर फिटनेस सर्टिफिकेट कर रहे हैं। जबकि अधिकांश यात्री बसों के पहिए घिस गए हैं, बसों से ऑयल रिस रहा है।
गाइडलाइन का भी पालन नहीं
- बसों में अपातकालीन खिड़कियों के पास सीट लगा दी गई है।
- प्राथमिक उपचार के लिए बसों में लगाए जाने वाले फर्स्ट एड बाक्स अब नजर नहीं आ रहे।
- अग्निशमन यंत्र भी एक्सपायर हो चुके हैं या हटा दिए गए हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों की बसों में जमकर की जा रही ओवरलोडिंग।
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