तहकीकात न्यूज @ चिरमिरी
निगम चिरमिरी परिवारवाद की भेंट चढ़ कर बन गया है कंगाल कर्मचारी वेतन को तरस रहे हैं तो पार्षद मानदेय को जिसमें निगम चिरमिरी में विकास नहीं बल्कि मिलीभगत व भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है जिसमें संतोष सिंह नेता प्रतिपक्ष निगम चिरमिरी कभी शासकीय नगर पालिक निगम चिरमिरी कहे जाने वाला निगम चिरमिरी वास्तव में पिछले 2 वर्षों में जनप्रतिनिधि के मामले में एक परिवार की निजी जागीर बनकर रह गया है जहां विकास के नाम पर मिलीभगत व भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है तो शासकीय की रकम का दुरुपयोग होने से जहां कर्मचारी कई कई महीनों से वेतन को तरसते हुए परिवार सहित भूखे पेट गुजर-बसर करने को विवश हैं तो वही निगम पार्षद भी कई कई महीने से अपने मानदेय को तरस रहे हैं सही मायने में निगम चिरमिरी परिवारवाद की भेंट चढ़ा कर पूरी तरह से कंगाल हो चुका है उपरोक्त आरोप लगाते हुए संतोष सिंह नगर पालिक निगम चिरमिरी नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि निगम चिरमिरी में भूखे रहकर काम कर रहे निगम कर्मचारी व ठेका कर्मचारियों के हितों में व समय पर वेतन भुगतान करने को लेकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों व पार्षदों के नेतृत्व में निगम चिरमिरी कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करके कुंभकरण की नींद में सोई महापौर व शासन प्रशासन को जगाने की कोशिश की वही अपने मांग में जनप्रतिनिधियों की जड़ या नीव कहे जाने वाले सम्मानित पार्षदों के लंबे समय से बकाया मानदेय का भुगतान समय पर करने की भी मांग पुरजोर ढंग से उठाई है जिस पर निगम महापौर व आयुक्त जनहित से जुड़ी इन मांगों को लेकर पूरी तरह निष्क्रिय व लापरवाह बने नजर आए हैं वही वहीं शासन के अधिकारियों के गुजारिश पर की दो-चार दिनों में मांगों के संबंध में ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी उक्त आंदोलन को विराम दिया गया था लेकिन निर्धारित समय पर निगम व या शासकीय अधिकारियों द्वारा कोई उत्साहजनक कदम ना उठाने पर विवश होकर शासकीय कार्यालयों के समक्ष आंदोलन की रूपरेखा को नए सिरे से बनाकर मैदान में उतरने के लिए विवश होना पड़ सकता है नेता प्रतिपक्ष संतोष सिंह का कहना है कि महापौर के द्वारा की जा रही फिजूलखर्ची व गुणवत्ता विहीन खरीदी के चलते ही निगम चिरमिरी दिनोंदिन कंगाल होने की स्थिति की ओर बढ़ चला है वर्तमान जनप्रतिनिधि के कार्य जनहित से ज्यादा स्वयं ही हित के होने के कारण आम जनता को अब तक कोई लाभ नहीं मिल रहा है वहीं उन्हें कागजी ख्वाब दिखाकर भुलावे में रखा जा रहा है चिरमिरी निगम की स्थापना के बाद निगम चिरमिरी की इतनी दयनीय खराब स्थिति कभी देखने को नहीं मिली रही है जिसका खामियाजा निगम कर्मचारी या पार्षद ही नहीं बल्कि ठेका कार्य से जुड़े हुए लोग भी उठाने को विवश है श्री सिंह के अनुसार निगम चिरमिरी में गुणवत्ता विहीन समान खरीदी का यह आलम है कि लगभग 45 लाख की लागत से खरीदे गए स्वच्छता से संबंधित सामान 45 दिन भी नहीं रूप में मैदान पर टिके नजर नहीं आए हैं इससे चिरमिरी की छवि प्रदेश स्तर तक प्रभावित हुई है यदि समय रहते महापौर अपने कार्यशैली में सुधार नहीं करती हैं तो उनके विरुद्ध जहां जन जागरण अभियान छेड़ा जाएगा वही निगम में पिछले 2 सालों में हुए भ्रष्टाचार से संबंधित कार्यों व खरीदी को लेकर न्यायालय की शरण लेने पर विचार भी किया जाएगा
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