बीते पखवाड़ेभर से जमकर शादियां हो रही हैं। कोरोना का संक्रमण कम होते ही पाबंदियां हटने के बाद भव्य रूप से करने के इच्छुक परिवारों ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया। लेकिन, अब 49 दिनों के लिए शादी की शहनाइयों में रोक लग गई है। क्योंकि, 24 फरवरी से देव गुरू बृहस्पति अस्त हो गये। अब 14 अप्रैल के बाद मुहूर्त है और तब मांगलिक शहनाइयां बज सकेंगी।
नवंबर से शुरू हुए विवाह लग्न समाप्त हो गया है, देवगुरू के साथ होलाष्टक लगने के साथ सूर्य का मीन मलमास हो गया। अगला विवाह मुहूर्त 15 अप्रैल से शुरू होगा। गुरू बृहस्पति 24 फरवरी को कुंभ राशि में अस्त होने के साथ 24 मार्च तक इसी अवस्था में रहेंगे।
इस कारण वैवाहिक उपनयन संस्कार व मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है। शास्त्रों के अनुसार विवाह में देवगुरू को उदय होना आवश्यक माना जाता है। बता दें कि मकर संक्रांति के बाद से जनवरी एवं फरवरी में मिलाकर कुल 13 विवाह मूहूर्त रहा है। इस दौरान जनवरी माह में कुछ विवाह कोरोना संकटकाल के पाबंदियों के बीच हुई, तो ज्यादातर विवाह पाबंदियां हटने के बाद हुई है।
प्रतिबंधित डीजे खूब बजी
कोरोना काल में दो साल के बीच में कई मौकों पर प्रतिबंधित डीजे इस साल खूब बजी है। डीजे की घून में निकली बारातों में नियमों की धज्जिायां उड़ाने में भी बाराती पीछे नहीं रहे हैं। प्रशासन ने भी उत्साह के देखते हुए सख्ती नहीं बरती। इससे दो साल से मंद पड़ा डीजे का व्यवसाय में तेजी देखने को मिली। वहीं, केटरिंग, रसोईयों, टेंट व शादी भवनों की बुकिंग में भी तेजी देखी गई।
49 दिन बाद होगा उदय, तब मुहूर्त
देवगुरु बृहस्पति को उदय होना हो आवश्यक माना जाता है। हिंद संस्कृति का काफी महत्व है। विवाह का दिन व लग्न निश्चित करते समन्व वर-वधु की जन्म पत्रिका अनुसार सूर्य, चंद्र व गुरू की गोचर स्थिति का ध्यान रखना अति आवश्यक होता है। इसलिए, बृहस्पति के अस्त हो जाने के कारण वैवाहिक मुहूर्त करीब डेढ़ माह तक नहीं है। 14 अप्रैल को देवगुरू के उदय होते ही विवाह के लिए शुभ लग्न की शुरूआत हो जाएगी।
dk

+ There are no comments
Add yours