दिनभर अवैध रेत और गिट्टी का परिवहन ट्रैक्टर व डंपर द्वारा बेखौफ किया जाता है। रातभर वाहन की आवाजाही लगी रहती है। जिला प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। प्रदेश सरकार की तमाम कवायदों के बावजूद बालू के अवैध खनन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जिले के कई थाना क्षेत्रों में धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है। रात होते ही रेत का काला कारोबार शुरू हो जाता है। सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॅालियां इस अवैध कारोबार में लगी हुई हैं। इस गोरखधंधे पर अंकुश लगाने में प्रशासन पूरी तरह असफल है।
जिले के पहाड़ी नालों में बालू का अवैध खनन रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने कड़े निर्देश दिए हैं। वन्य भूमि जीव क्षेत्र से गुजरने के कारण पहाड़ी नालों में अवैध खनन करना प्रतिबंधित है। सरकार के निर्देश व प्रतिबंध के बावजूद पहाड़ी नालों में बालू का अवैध खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है। शाम होते ही ट्रैक्टर-ट्रालियां नदी व पहाड़ी नालों में उतर जाती हैं। रात भर ट्रैक्टर-ट्रालियों में बालू भरकर ठिकाने लगाया जाता है।
प्रशासन के तमाम दावो के बावजूद रेत का अवैध खनन होने से पूरा प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में है। वही पर जानकारो की माने तो सत्तापक्ष तथा प्रशासन के ही तमाम लोग रेत माफिया को संरक्षण दे रहे हैं। रेत माफिया अवैध ढंग से बालू का खनन करके जहां मालामाल हो रहे हैं, वहीं मंहगे दाम पर रेत बिकने के कारण लोगों को घर बनाने में दिक्कत हो रही है। बैकुन्ठपुर, खडगवा और भरतपुर क्षेत्र में रेत खनन का अवैध कारोबार सबसे अधिक हो रहा है। यहां रेत माफिया पर शिकंजा कसने में प्रशासन पूरी तरह फेल है।
प्रदेश सरकार के तमाम दावो के बावजूद रेत की कीमतें इन दिनों बाजार में छह माह पुराने स्तर पर जा चुका है। भवन निर्माण करने वालो का कहना है कि अभी रेत के दामो में कोई ाहत नही है। रेत के साथ ही अब दूसरे भवन निर्माण सामग्री की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। छड, सीमेंट व ईंट की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
वर्जन….
जहॉ से भी षिकायते मिलती हैं । विभाग लगातार कार्यवाई करता रहता है ।
त्रिवेणी देवांगन – खनिज अधिकारी कोरिया

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