जिला मुख्यालय स्थित बैकुन्ठपुर पर परिवहन कार्यालय पर इन दिनों दलालों का कब्जा है। विभाग के परिसर एवं कमरों में तो हर दिन बड़ी संख्या में इन दलाल का जमावड़ा लगा रहता है। साथ में विभाग के कमरों एवं कार्मिकों की टेबल-कुर्सी पर भी इन्हीं का कब्जा है। गुरुवार को दिन में जिला परिवहन कार्यालय में बाहर अपने अपने कामो को लेकर गये लोगो ने बताया कि साहब के जाओ तो कहतें हैं कि जाओ अभी नही होगा काम । हालांकि लोगो ने अधिकारी के डर से कुछ नही कहा किन्तु यह बता दिया कि दलालो को पैसा नही दिया इसलिए दौडना पड रहा है।
बताया जाता है कि सप्ताह में सिर्फ 2 ही दिन काम करते हैं वो भी कुछ खास समय पर। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला परिवहन कार्यालय की अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं। वाहन स्वामी अपने वाहनों से संबंधित कार्य घर बैठे कर सकता है। जबकि कुछ कार्य एजेंसियों के पास भी चले गए हैं। इसके बावजूद दलालों की संख्या में कोई कमी नहीं है। जानकार बताते हैं कि ज्यादातर दलालों के हाथों में गोपनीय फाइलें एवं जरूरी दस्तावेज रहतें हैं। कार्यालय में दबदबा इतना है कि बगैर इनकी मर्जी के कोई फाइल इधर-उधर नहीं हो सकती है। दफ्तर का बाबू अगर अवकाश पर जाता है तो उसकी जिम्मेदारी भी ऑफिस का अन्य कार्मिक नहीं बल्कि दलाल ही निभाते हैं।
2 दर्जन से अधिक दलाल हैं सक्रिय
लोगो ने बताया कि डीटीओ कार्यालय में बगैर एजेंट के कार्य मुश्किल है। कार्यालय से करीब 25 से 30 दलाल जुड़े हुए हैं। एजेंट से जब लाइसेंस के बारे में पूछा तो उसने बताया कि आप तो रुपए जमा करवा दो इसके बाद हम बनवा देंगे। राशि के बारे में पूछा तो उसने बताया कि 2500 रुपए लगेंगे। पूरा काम करवा दिया जाएगा। इस सबंध में जिला परिवाहन अधिकारी अनिल भगत का पक्ष लेने की हर संभव कोसिस किया किन्तु उन्होने कोई जवाब देना जरुरी नही समझा।
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