कोरिया जिले में भी इन दिनो राज्य के झगडे का असर साफ-साफ नजर आने लगा है। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के झगडे को लेकर कोरिया कांग्रेस दो फाड हो गई है। कोरिया जिले के ज्यादातर पदाधिकारी बाबा गुट के माने जाते हैं और कोरिया कांग्रेस में हमेशा से ही अंबिकापुर का प्रभाव रहा है इसलिए इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता है कि एक पार्टी में होने एवं संभाग के प्रमुख नेता के तौर पर टी एस सिंह देव की मान्यता सर्वमान्य रही है। जिसके कारण उन्हें संभाग के सभी जिलों के कांग्रेसी अपने अभिभावक के तौर पर देखते रहे है।
इन दिनों कांग्रेसियों की मजबूरियां भी उनकी ऑखो में नजर आती है किन्तु अनजाने भय के कारण दिल की बात जुॅबा पर लाने से सभी कांग्रेसी डर रहे है। प्रदेश संगठन के डर से कांग्रेसी टी एस सिंह देव के समर्थन में सामने दिखना नहीं चाहते हैं । अन्यथा उन्हें अपने पद खोने का भय भी सताने लगा है । कांग्रेसियों का कहना है कि जो स्थितियां वर्तमान में पूरे संभाग में हैं उसमें आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का पूरी तरीके से सूपड़ा साफ होता स्पष्ट नजर आ रहा है।
आपसी झगड़े और मनमुटाव के कारण इस बार जो स्थितियां विधानसभा चुनाव के दौरान रही हैं उसके ठीक उलट आगामी परिणाम आने वाला दिख रहा है। हालांकि लोग टीएस सिंह देव के साथ सहानुभूति और समर्थन दोनों रखते हैं किंतु खुलकर कुछ भी बोलना नहीं चाहते । इक्का-दक्का नेताओं को छोड़कर बाकी सामने आकर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं।
विदित हो कि विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त होते ही एक बार फिर कांग्रेस विधायकों की लामबंदी शुरू हो गई है। राज्य में ढाई-ढाई वर्ष तक सीएम का फार्मूला फिर से चर्चा में है। मंत्री टीएस सिंहदेव ने कुछ दिन पहले सीएम भूपेश बघेल को पत्र लिखकर सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया था। उन्होंने पंचायत विभाग भी छोड़ दिया था। सिंहदेव विधानसभा के मानसून सत्र में भी एक दिन भी नहीं पहुंचे।
भूपेश समर्थक विधायकों की फिर से दिल्ली में परेड कराने की तैयारी चल रही है। गौरतलब हो कि इससे पहले भी पिछले साल अगस्त में 52 विधायकों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समर्थन मंे दिल्ली में डेरा डाल दिया था। एक बार फिर पुनिया शुक्रवार को रायपुर पहुंच गये हैं। वे आगे की रणनीति पर विचार करेंगे।
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