गरिबो को न्याय में सुविधा के लिए कोरिया जिले में 4 डिफेंस कौंसिंल नियुक्त……

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डिप्टी चीफ डिफेंस कौंसिंल बने राजेंद्र प्रसाद कुशवाहा

BAIKUNTHPUR   @  Tahkikat News……… Develop    BY    ASHOK SINGH 

जिला न्यायालय में पुलिस का पक्ष रखने वाले अभियोजन अधिकारियों की तरह अब जिला अदालतों में विधिक सेवा के डिफेंस काउंसिल नियुक्त किये गये हैं। जो कोर्ट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पीड़ित पक्षकारों की पैरवी करेंगे। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की अनुमति के बाद राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने डिफेंस काउंसिल की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया में जिला न्यायालय कोरिया में भी मुख्य डिफेंस काउंसिल, उप डिफेंस काउंसिल, सहायक डिफेंस काउंसिल के पद नियुति दी गई है। जिसमें कोरिया जिले के लिए चीफ लीगल डिफेंस कौंसिंल के तौर पर अजय कुमार सिंह, डिप्टी चीफ डिफेंस कौंसिंल राजेंद्र प्रसाद कुशवाहा, असिस्टेंट डिफेंस कौंसिंल के बी नामदेव एवं श्रीमती मंजू पांडे को बनाया गया है।

कमजोर वर्ग को मिलेगा लाभ

डिफेंस काउंसिल सिस्टम का सबसे ज्यादा लाभ वंचित व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिलेगा। फिलहाल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, स्त्री, बालक, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, विकलांग, औद्योगिक कर्मकार या ऐसा व्यक्ति जिसकी वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम है, के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज होने पर विधिक सेवा प्राधिकरण उसकी तरफ से कोर्ट में पक्ष रखने के लिए निःशुल्क वकील उपलब्ध करवाता है। इसके लिए वकीलों की पैनल बनाई गई है। पैनल में शामिल वकीलों को हर केस का दो से ढाई हजार रुपये तक भुगतान किया जाता है। पैनल में शामिल वकीलों को निजी वकालत की अनुमति भी होती है। इसके चलते जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा सौंपे गए मामलों पर ये वकील अपना पूरा ध्यान नहीं दे पाते। इसका सीधा नुकसान पक्षकार को होता है। नई व्यवस्था के तहत डिफेंस काउंसिल के रूप में नियुक्त वकील को एक ही काम करना होगा। उन्हें निजी वकालत की अनुमति नहीं होगी। इससे पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में अपेक्षाकृत आसानी होगी।

निजी वकालत की रहेगी मनाही

अभियोजन अधिकारी के समान ही विधिक सेवा प्राधिकरण के डिफेंस काउंसिल के लिए अलग से कार्यालय की व्यवस्था की जाएगी। उन्हें आफिस सहायक, क्लर्क, टाइपिस्ट, मुंशी व अन्य कर्मचारियों की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। डिफेंस काउंसिल की नियुक्ति दो वर्ष के लिए होगी और इस दौरान वे वकील निजी वकालत नहीं कर सकेंगे। राज्य में डिफेंस काउंसिल सिस्टम अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। डिफेंस काउंसिल की सुविधा महज आपराधिक मामलों में ही मिलेगी।

ये होगी जिम्मेदारी

मुख्य डिफेंस काउंसिल के लिए आपराधिक प्रकरणों में पैरवी का न्यूनतम 10 वर्ष का अनुभव जरूरी है। साथ ही सत्र न्यायालय में कम से कम 30 प्रकरणों में पैरवी करना अनिवार्य है। उप डिफेंस काउंसिल के लिए आपराधिक प्रकरणों में पैरवी का न्यूनतम सात वर्ष का अनुभव होना चाहिए। सत्र न्यायालय में कम से कम 20 प्रकरणों में पैरवी आवश्यक है। सहायक डिफेंस काउंसिल के लिए आपराधिक प्रकरणों में एक वर्ष से तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए।

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