चुनावी साल में सहकारी समिति कर्मचारी भी आंदोलन की राह पर, 9 मई को रायपुर में धरना-प्रदर्शन

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चुनावी साल में अब एक बार फिर से छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने भी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संघ के बैनर तले प्रदेश भर के सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर 9 मई मंगलवार को रायपुर में प्रदेश स्तरीय एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करने जा रहे हैं।

संघ की मांग है कि प्रदेश के प्राथमिक प्राथमिक, वृहताकार, आदिम जाति और कृषक सेवा सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारियों को राज्य शासन का कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। साथ ही, नियमितीकरण की सुविधा व लाभ देते हुए समान वेतन दिया जाए। इसी मांग को लेकर प्रदेशभर के सहकारी समितियों के कर्मचारी 9 मई को नवा रायपुर के तूता निमोरा में धरना प्रर्दशन कर सरकार को उनके द्धारा किया गया वादा याद करायेंगे।


इस संबंध में जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश सहकारी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रभाकर सिंह ने बताया कि मंगलवार को एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन के माध्यम से हम प्रदेश सरकार को यह याद दिलाना चाहते हैं कि उन्होंने चुनाव पूर्व अपनी घोषणापत्र में जो वादा किया था वह अब तक पूरा नहीं हो सका है।


इस दौरान विगत साऐ साच वर्ष में कई बार सहकारी समितियों के लोगों को आंदोलन कर इसकी याद भी दिलानी पड़ी । किंतु बार-बार आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं हुआ । इसलिए हम एक बार फिर सरकार आगाह कर रहे हैं कि अब समय आ गया है कि वह अपनी की हुई घोषणाओं को अमल करें यदि सरकार अब भी आनाकानी करती है तो आने वाले समय में बड़ी आंदोलन की रूपरेखा भी बनाई जाएगी ।


प्रभाकर सिंह ने बताया कि समिति कर्मचारियों का नियमितीकरण विगत साऐ चार सालों से अधूरा है। सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारी सहकारिता विभाग के अंतर्गत प्रदेश के 2058 समितियों में कार्यरत हैं जिन सहकारी समितियों का संचालन 1919 से हो रहा है लेकिन समिति कर्मचारियों को आज तक किसी ने भी सुध लेने की कोशिश नहीं की । जबकि शासन के महत्वपूर्ण कार्य को समिति के माध्यम से समिति के कर्मचारी ने अंजाम देते हैं ।

कोविड-19 संक्रमण काल में सरकार पर पड़ रहा है आर्थिक बोल के मद्देनजर शारीरिक श्रम के साथ प्रदेश के सहकारी समिति में कार्यरत कर्मचारी कोरोना काल में भी धान खरीदी पीडीएस चावल वितरण किसानों को केसीसी खाद बीज वितरण के साथ-साथ छत्तीसगढ़ सरकार के सभी महत्वकांक्षी योजनाओं को समिति कर्मचारियों ने सफलतापूर्वक निभाया ।

समिति कर्मचारियों को समिति स्तर पर जो वेतन मिल रहा है जो किसी भी स्थिति में जीने लायक वेतन नहीं माना जा सकता है । महासंघ रायपुर द्वारा सरकार को अपने वादे को याद दिलाने के लिए 1 वर्ष पहले 2021 में लगातार चरणबद्ध धरना प्रदर्शन रैली विधानसभा घेराव कर चुका है । तबसे हमें बजट सत्र का इंतजार था । लेकिन उसमें भी निराशा हाथ लगी । प्रदेश के कई समितियों में वेतन नहीं मिलने व बढ़ती महंगाई से बच्चों की पढ़ाई लिखाई सहित परिवार के भरण पोषण एवं अन्य जरूरी खर्चे पूरे नहीं हो पा रहे हैं ।

हमें सामाजिक परिस्थितियों के दायित्व के निर्वहन को पूरा करने के लिए कर्ज लेने पड रहे हैं इस समय प्रदेश भर के 2058 समितियों में 13900 समिति कर्मचारी कार्यरत हैं । बेहतर होगा कि सरकार हमारी आर्थिक स्थिति को समझे और हमें न्याय दें। हमारी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए । वर्ना मजबूरन आने वाले दिनो में समिति के कर्मचारी काम बंद कर अनिश्चितकालीन आंदोलन करने को विवश होंना पडेगा।

ये है 4 सूत्रीय मांगे

  1. प्रदेश के समस्त सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारियों का नियमितीकरण
  2. सरकारी कर्मचारी की भांति वेतन दिया जाए
  3. प्रदेश के समितियों में भर्ती प्रक्रिया को पूर्णता समाप्त कर समिति कर्मचारियों का समायोजन किया जाए
  4. समर्थन मूल्य में धान खरीदी उपार्जन केंद्रों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर का वेतन 9 से 12 माह किया जाए

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