जिला अस्पताल ही खुद लोगों की स्वास्थ्य का दुश्मन बन गया है। अस्पताल में रोजाना निकलने वाले बायोवेस्ट के निस्तारण के उचित प्रबंध नहीं हैं। अस्पताल परिसर में इन दिनों बायोवेस्ट खुले में रखा जा रहा है। इस सबंध में गौरक्षा वाहिनि के जिला अध्यक्ष और शहर के जागरुक नागरिक अनुराग दुबे ने बताया कि पट्टियां, सीरिंज, खाली बोतल, टिश्यू आदि मेडिकल कचरे का ढेर पड़ा है। बायोवेस्ट के निस्तारण के निर्धारित प्रोटोकाल का पालन नहीं किया जा रहा है। उल्टे सफाईकर्मी कचरा इकट्ठा करके इसे अस्पताल के छत पर रख रहे हैं।
जानकारो का कहना है कि मेडिकल बायोवेस्ट को ख्ुाले में रखने से वातावरण प्रदूषण हो रहा है जिससे अस्पताल में भर्ती मरीज और नवजात शिशुओं की सेहत को खतरा है। वही पर आसपास रहने वाले लोगों में भी संक्रमण फैलने का खतरा है। जिला अस्पताल में इसके निस्तारण की व्यवस्था होने के बावजूद भी अस्पताल प्रबंधन के द्वारा बायोवेस्ट को खुले परिसर में रख जा रहा है। यह हालात तब हैं जब अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. ए.के करण स्वयं बायोवेस्ट को खुले में होने वाले हानिकारक प्रभाव के बारे में बखूबी जानते हैं।
घातक हो सकती हैं थैलियॉ
मानसून अब दसतक देने ही वाला है यदि इन थैलियो को निस्तारण एक दो दिनो में नही किया गया तो फिर मानसून में इन थैलियो में रखे मेडिकल वेस्ट जल प्रदूषण के साथ साथ वायु प्रदूषण को भी खतरनाक बना देंगी।
हानिकारक है मेडिकल वेस्ट
दूसरी ओर डॉक्टर खुद मानते हैं कि अस्पताल में निकलने वाली पट्टियां खराब खून, सीरिंज, इंजेक्शन तथा अन्य सामग्री लोगों के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। खुले में रखी बायोवेस्ट का समय पर निस्तारण नहीं किए जाने पर इसमें से अजीब सी दुर्गंध आने लगती है तथा इसके संक्रमण से बीमारियां फैलने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में इस बायोवेस्ट को तुरंत प्रभाव से निस्तारण करने की कार्रवाई को अमल में लानी चाहिए।
आवारा पशुओ का जमावड़ा भी मुश्बित
जिला अस्पताल परिसर के बाहर होटलो और ठेलो से मिलने वाले वेसट खादय सामग्रियो के खाने के सडक में इन आवारा पशुओ के जमावडा राहगीरो समेत अस्पताल में आने जाने वाले लोगो के लिए जानलेवा मुश्बित खडी कर देते हैं। कभी कभी अस्पताल परिसर के अन्दर भी इन आवारा पशुओ का भी जमावड़ा लगा रहता है। कचरो के ढेर में मुंह मारते पशु कचरा इधर-उधर फैला देते हैं। इस कारण अस्पताल में आमजन को काफी तकलीफ उठानी पड़ रही है।
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