छत्तीसगढ विधानसभा चुनाव का समय जैसे जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे वैसे राजनैतिक दलों और नेताओं के दिलों की धड़कने भी तेज होती जा रही है। किसे टिकट मिलेगा और किसका कटेगा की चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए हारी हुई सीटों पर 21 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब बीजेपी ने चुनाव की घोषणा से पहले उम्मीदवारों का ऐलान किया है। खबर आ रही है कि केन्द्रीय नेतृत्व के द्वारा कराए गए सर्वे के बाद यह लिस्ट जारी की गई है। सरगुजा संभाग के 14 सीटो में से 5 सीटो पर प्रत्यासियो के नामो की घोषणा ने पुरे क्षेत्र में राजनिति चर्चा का बाजार गर्मा दिया है। लोग अपने अपने विधानसभा क्षेत्रो में प्रत्यासियो के नामो को लेकर कायास लगाने लगे हैं।
गत दिनो दिल्ली में भाजपा की बैठक के बाद जिस र्फामूले के तहत टिकटो के वितरण की बात कही जा रही है उसमें ए,बी,सी,डी र्फामूला कहा जा रहा है। इस र्फामूले से क्षेत्र की बात करंे तो भरतपुर-सोनहत, बैकुन्ठपुर और मनेन्द्रगढ तीनो ही विधानसभा बीजेपी के बी ग्रेड में आता है। अब देखना होगा कि अततः टिकट किसे दिया जाता है राम विचार नेताम को टिकट मिलना जहा भाजपा के पुराने और कददवर चेहरो पर विश्वास जता रहा है तो वही पर पूर्व गृहमंत्री राम सेवक पैकरा को प्रतापपुर विधानसभा से टिकट न दिया जाना अटकलो का बाजार भी गर्मा रहा है। हालांकि बैकुन्ठपुर विधानसभा में जीत की गांरटी माने जा रहे भाजपा के पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े के समर्थक निशचिंत है कि पार्टी उन्हें ही अपना प्रत्याशी बनाएगी । बैकुंठपुर विधानसभा में जाति समीकरण भी उनके पक्ष में नजर आ रहा हैं ।
भैयालाल राजवाड़े का कद कुछ इस प्रकार माना जाता है कि वे सिर्फ बैकुंठपुर विधानसभा ही नहीं अपितु क्षेत्र की चार से पांच विधानसभा में अपनी पैठ पकड रखते हैं । दूसरी ओर मनेंद्रगढ़ विधानसभा में भी श्याम बिहारी जायसवाल को टिकट लगभग तय माना जा रहा है । भरतपुर-सोनहत में चंपा देवी पावले के नाम पर कुछ सस्पेंस की बात राजनीतिक हलकों में कहीं जा रही है । बीते विधानसभा में इन तीनों विधानसभा में हार के अंतर की बात करें तो बैकुंठपुर एवं मनेंद्रगढ़ विधानसभा में हार का अंतर 5000 के आसपास था तो वहीं पर भरतपुर में यह अंतर बढकर 15000 से अधिक हो गया था। यही एक बात है जो चंपा देवी पावले के खिलाफ जा सकती है । हालांकि भरतपुर सोनहत विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के पास दूसरे कई नाम तो समय-समय पर सामने आते रहे किंतु उनके नाम पर पार्टी में सहमति नजर नही आई। अब यह देखना होगा कि पार्टी इन तीनों विधानसभा में अपने पिछले प्रत्याशियों के नाम की ही घोषणा करता है या फिर नए प्रत्याशियों को आजमाता है भाजपा की जीत भी इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
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