परिवार, समाज व देश के विकास के लिए बच्चों में शिक्षा बहुत जरूरी

प्रारंभिक बाल्यवस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) के तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण बैकुंठपुर के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित की गई है। जिले के 111 बालवाड़ी केन्द्रों के कार्यकर्ता व 222 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्यस्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किए मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
23 से 25 मई तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में आज समाजसेविका, प्रोफेसर डॉ.एकता लंगेह ने प्रशिक्षण स्थल पहुंचकर बहुत ही सारगर्भित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों के नैसर्गिक विकास के साथ उनकी रूचि को पहचानना बहुत जरूरी है। डॉ. लंगेह ने बालिका शिक्षा के बारे में कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में एक ऊंचे मुकाम हासिल कर रही हैं। शिक्षा तो जरूरी है ही साथ उनके हुनर को भी पहचाना जाना चाहिए। क्योंकि हर बच्चे में अलग-अलग विधा होते हैं। इसलिए हमें उनकी रूचि के अनुसार खेल, कला, संगीत, शिक्षा, प्रशासनिक, डॉक्टर, इंजीनियर, समाजसेवा आदि को परखते हुए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

उन्होंने बालवाड़ी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि आप लोग बच्चों के परवरिश के साथ उनके खेल-खेल में पढ़ाई-लिखाई कराते हैं, वह सराहनीय है। इसके अलावा उन्हें घर से जो संस्कार मिलता है आप लोगो से जो सीख मिलती है, वह जीवन में बहुत उपयोगी होते हैं, इसलिए बहुत ही जिम्मेदारी व लगन के साथ, स्वप्रेरणा होकर बच्चों का भविष्य बनाए।

डॉ. एकता लंगेह ने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्रों से निकलकर जो बच्चे स्कूल में पढ़ाई करेंगे, उनके सर्वागीण विकास पर शिक्षक-शिक्षिकाएं अवश्य ध्यान दें। वे बीच में पढ़ाई न छोड़े यह ध्यान जरूर रखें।

बता दें 5 वर्ष की कम आयु वाले प्रत्येक बच्चों को प्रारंभिक कक्षा या बालवाटिका में भाग लेते हैं जिसमें ईसीसीई द्वारा योग्य शिक्षक होते हैं। मिड डे मील कार्यक्रम का लाभ प्राथमिक कक्षाओं तक विस्तारित किया जाता है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन आज बीईओ देवेश कुमार जायसवाल, बीआरसी नीलेश गुप्ता, मास्टर ट्रेनर्स दीपक तिर्की, दिनेश नायक, जितेंद्र साह, अनूपा लकड़ा, महिला बाल विकास विभाग के सेक्टर सुपरवाइजर वित्तबाला श्रीवास्तव व परियोजना अधिकारी सरस्वती डे उपस्थित थे।

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