हादसे के बाद मनेन्द्रगढ कलेक्टर ने रातो-रात मीना बाजार को भगाया

बैकुंठपुर में क्यो मिली और कैंसे मिल गई संचालन की अनुमति

कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के खरवत में कलेक्टोरेट के बगल में गत सप्ताह से आयोजित मीना बाजार में लोगों सुरक्षा से खिलवाड किया जा रहा है। गौरतलब हो कि बीते जून के महिने में एमसीबी जिले के मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ में मीना बाजार में झूला झूलाने के दौरान हादसा होने के बाद मनेन्द्रगढ़ के कलेक्टर ने इस मीना बाजार का रातो रात बोरिया बिस्तर पैक करा कर उसे भेज दिया । बताया जा रहा है कि वही मीना बाजार संचालक बैकुंठपुर में आकर अपनी दुकान सजाए बैठा है। वहीं पर उसने अपनी कार्यशैली में सिर्फ इतना सा बदलाव लाया है कि उसने एक बैनर छपवाकर मीना बाजार में टंगवा दिया है जिसमें मीना बाजार के संचालक के द्वारा झूला झूलने वालों के लिए लिख दिया है कि किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार मीना बाजार संचालक नहीं होगा ।
क्या मीना बाजार संचालक की इस लाईन लिख कर टांग देने भर से उसकी जिम्मेदारी पूरी हो जाती है । यदि हो जाती है तो फिर लोगो को एैसे मीना बाजार से बचना चाहिए। जिस मीना बाजार को सुरक्षा में अनदेखी के कारण मनेन्द्रगढ़ से भगाया गया उसे बैकुंठपुर में किन अधिकारियों द्वारा अनुमति दे दी गई । अधिकारियों द्वारा एक बार भी यह सोचने का प्रयास नहीं किया गया कि पड़ोस के जिले में हादसे होने के बाद यहां पर इस मीना बाजार संचालक को किस प्रकार से अनुमति दे दी जाए।
आम जनता को मिलने वाली सामान्य सुविधा में कमी और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के बावजूद मीना बाजार संचालन हो रहा है जिम्मेदार अधिकारी को व्यवस्था पर ध्यान देने के बाजाय अनदेखी और तरफदारी क्यो की जा रही है इस बारे में आम लोगो में र्चचा का बाजार गर्म है।

हादसे पर अनुमति देने वालो पर हो कार्यवाई

जिला प्रशासन के द्वारा मीना बाजार लगाने की अनुमति दी गई है। लेकिन जन सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासनिक अमला अनुमति देकर ड्यूटी पूरी कर चूका है आगे संचालन, व्यवस्था, के साथ गतिविधियों पर कोई ध्यान नहीं दीया जा रहा है जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारो का कहना है कि जीस अधिकारी ने संचालन की अनुमति दी है उसकी ही जिम्मेदारी किसी हादसे के बाद तय होनी चाहिए।

सारे नियम कायदे ताक पर प्रशासन मौन

मीना बाजार के झूलों की गुणवत्ता, जैसे हवाई झूले में सुरक्षा के लिए लॉक जैसा कुछ नहीं है। ऑपरेटरों का कार्य कौशल, मेले में आने जाने वाले लोगों के लिए सुरक्षा व्यवस्था में फायर किट, मेडिकल किट, सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे और निशुल्क पीने का पानी, महिला-पुरुष के लिए सुलभ-शौचालय, जैसी आवश्यक सुविधाओ में कमी व दिव्यांग और निःसक्त जनों के लिए अंदर जाने बाहर आने के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है इस तरह मनोरंजन मेले के संचालन में कमी के बावजूद कोई सुध लेने वाला नहीं है।

कर्मियो का पुलिस वेरिफिकेशन नही

मीना बाजार को संचालित करने वाले सभी कर्मियो का पुलिस वेरिफिकेशन किया जाना चाहिए। किन्तु मिली जानकारी की माने तो अब तक मीना बाजार के एक्का दुक्का कर्मियो का ही वैरिफिकेशन किया गया होगा। विदित हो कि शासन के तय नियमो के अनुसार जिले से बाहर से व्यापार करने वाले लोगो को थाने में जाकर अना वैरिफिकेशन कराना होता है।

फायर सुरक्षा नियम ताक पर

मीना बाजार में ग्रामीण सहित शहर के लोग प्रतिदिन हजारों की संख्या में महिलाओं और बच्चों के साथ घूमने जा रहे हैं। मीना बाजार परिसर में नास्ते की दुकाने संचालित है जहॉ कई गैस सिलेंडर से चूल्हे जलाये जा रहे हैं। सवाल यह है कि बैगर सुरक्षा नियमो के किस प्रकार सार्वजनिक स्थानो पर गैंस सिलेन्डर जलाये जा रहे है। क्या इसने फायर सुरक्षा टेस्ट करा कर अनुमति लिया है यदि नही तो फिर इन दुकानो का संचालने कैंसे हो रहा है।

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