शादी से लेकर तलाक तक की है परंम्परा…..क्या कहता है विज्ञान

विगत चार दिनो से कोरिया जिले में हो रही झमाझम बारिश को दौर अनावरत जारी है। तेज बारिशो के इस दौर में शुक्रवार की देर शाम कई वर्षों के बाद मेंढकों की तारने सारी रात घरों के अंदर कांनो तक पहुॅचती रही। बारिश और मेंढकों का रिश्ता कोरिया जिले के परंपराओं में भी वर्णित है। बारिश नहीं होने की अवस्था में मेंढको की शादी करने की पुरानी परंपरा आज भी कायम है वहीं पर इनके तालाक भी कराये जाते हैं।
धर्मों, जातियों, समुदायों में हमारी विविधता के कारण क्षेत्र में सैकडों त्यौहार, परंपराएं और रीति-रिवाज हैं जिनका पालन किया जाता है। इनमें से बहुत से रीति-रिवाज सैकड़ों से हजारों साल पहले अंधविश्वास से भी पैदा हुए थे। इनमें से ही एक रिवाज मेंढको को लेकर भी है।

बारिश नही होने पर कराते हैं शादी


जिस पर आपको विश्वास करना मुश्किल हो सकता है वह है बारिश के देवता को खुश करने और अधिक बारिश लाने के लिए दो मेंढकों की शादी कराना। जिले में जब भी मानसून में देर होती है या फिर मानसून अटक जाती है तो ग्रामिणो द्धारा इंद्र देवता को खुश करने दो मेंढकों की पूरे रिति रिवाज से शादी कराई जाती है। पूर्वजों का मानना था कि अगर मेंढक टर्राते हैं और अपने साथी को बुलाते हैं, तो बारिश होती है।

ऐसे कराई जाती है शादी


मेंढक की शादी के प्रचलित रसम में मेंढकी को बिठाकर जिस्म पर तेल लगाया जाता है। उसके बाद, उसे कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाता है और पानी से नहलाया जाता है और उसके विवाह के दिन के लिए तैयार किया जाता है। इस बीच, सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठा होते हैं और वैदिक भजनों का पाठ किया जाता है। बाद में मेंढकी को सिंदूर लगाकर जीवन भर के लिए अपने साथी से बांध दिया जाता है। एक बार शादी हो जाने के बाद, दुल्हन को एक सजी हुई हाथ गाड़ी में दूल्हे के घर भेजा जाता है। बाद में, जोड़े को तालाब में छोड़ दिया जाता है और फिर लोग बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं।

बारिश बंद न हो तो तलाक भी


हमारा देश कई तरह की मान्याताओ से जकडा हुआ है आज भी ग्रामिण क्षेत्रो में उसका पालन पूरी निष्ठा के साथ किया जाता है। वर्षा कराने के लिए जहां मेढकों की शादी कराई जाती है वहीं एक अन्य रिवाज में यदि अत्यधिक वर्षा हो तो उसे रोकने के लिए मेढकों का तलाक भी कराये जाने की बात बताई जाती है। यानी शादी के दो महीने बाद तलाक भी।

मेंढक करती हैं बीमारियो पर नियत्रंण


गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि देश में मेंढकों की विभिन्न प्रजातियों की संख्या तेजी से कम हो रही है। शोध के नाम पर और कीटनाशकों के चलते बड़ी संख्या में मेंढकों का खात्मा हुआ है। देश में मेंढक कम होने से बीमारियां बेकाबू हो रही हैं। ऐसे में कई तरह की मौसमी और विषाणुजनित बीमारियों- मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियों का विस्तार हो रहा है।

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