कौन होगा बीजेपी का अगला अध्यक्ष? दावेदारों में कई दिग्गज आये सामने….तय आचार संहिता…दागी और बाहरी नहीं स्वीकार….मंगलवार को रायपुर में होगी बैठक में होगा निर्णय

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बैकुंठपुर।

रविवार को देर शाम तक कोरिया मुख्यालय बैकुंठपुर के भाजपा कार्यालय में गहमागहमी का माहौल रहा। इस दौरान चुनाव प्रभारी प्रबोध मिंज ने नवनिर्वाचित संगठन एवं पूर्व मंडल संगठन के पदाधिकारी से वन टू वन बात किया । भाजपा कार्यालय में जिला संगठन सहित वर्तमान मंडल, पूर्व मंडल के सभी पदाधिकारी बैकुंठपुर विधायक भइयालाल राजवाडे भी मौजूद रहे।

इस दौरान कोरिया भाजपा जिलाध्यक्ष के सात दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। जिसमें वर्तमान जिला संगठन के दो उपाध्यक्ष शैलेश शिवहरे एवं देवेंद्र तिवारी, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य रेवा यादव, लक्ष्मण राजवाड़े, पंकज गुप्ता, कमलेश यादव व विनोद साहू के नाम सोशल मीडिया में तेजी से ट्रेंड कर रहे। जबकि इस सबंध में र्तमान में कोई भी मुह खोलने को तैयार नही है।

इन बिंदूओ पर खरे उतरे तक ही होगा विचार

कृष्ण बिहारी जायसवाल की जगह कौन लेगा? इस सवाल का जवाब खोजने के लिए बीजेपी ने संगठन चुनाव के लिए कोरिया बीजेपी के कई कद्दावर नेता लॉबिंग कर रहे हैं। भाजपा के मुताबिक, 31 दिसंबर तक जिला अध्यक्षों के चुनाव होंगे। इसमें तय किया गया है कि मंडल या जिला अध्यक्ष तभी बनाया जा सकेगा, जब वह दो बार का सक्रिय सदस्य हो। दो बार के सक्रिय सदस्य बनने के लिए 2019 में भी सक्रिय सदस्य बनना जरूरी होगा, क्योंकि इसके बाद सक्रिय सदस्यता अभियान नहीं चला और संगठन चुनाव नहीं हुए हैं। अगर किसी भी बाहरी दल से आए हुए कार्यकर्ता ने 2019 के बाद पार्टी जॉइन की है तो वह इस दायरे से बाहर हो जाएगा। यह भी तय किया गया है कि जिसे भी जिला अध्यक्ष बनाया जाएगा, वह कम से कम दो बार पार्टी में किसी न किसी पद पर पदाधिकारी रहा हो। वहीं, दो बार मंडल अध्यक्ष या जिला अध्यक्ष रह चुके लोगों को भी रिपीट नहीं किया जाएगा।

पार्टी विरोधी रिकार्ड पर होंगे अयोग्य

आचार संहिता में यह भी तय किया गया है कि जिला अध्यक्ष वही बन सकेंगे, जिनकी कभी भी निष्ठा संदिग्ध न रही हो। यानी अगर कोई भी कार्यकर्ता पर लोकसभा, विधानसभा या निकाय चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है तो वह चुनाव लड़ने के अयोग्य माना जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि जिस पर किसी भी तरह का कोई आपराधिक मामला दर्ज रहा हो, उसे भी अध्यक्ष न बनाया जाए। इसकी सीधी जिम्मेदारी जिला चुनाव अधिकारियों, सह जिला चुनाव अधिकारियों और जिलों में भेजे गए पार्टी के पर्यवेक्षकों की रहेगी।

आम सहमति पर फोकस

यह भी तय किया गया है कि जिले के अध्यक्ष का चुनाव आम सहमति से हो। कोशिश होगी कि ज्यादातर जगह आम सहमति से ही अध्यक्ष तय कर लिए जाएं और चुनाव की नौबत न आए। इसकी सीधी जिम्मेदारी पर्यवेक्षकों को दी गई है। विधायकों, सांसदों और महापौर की संगठन चुनाव में राय तो ली जाएगी, पर उनकी सिफारिश पर ही कोई नियुक्ति नहीं होगी।

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