प्रशासन की कोशिश नाकाम…..जारी है कोल माफियाओ का खेल…..स्थानिय ईट भटटो में खपाये जा रहे कोल
पटना में सबसे अधिक अवैध खदाने जबकि बैकुंठपुर व चरचा के पहाडी क्षेत्रो से हो रहा उत्खनन
पिछले दिनो वन विभाग के कर्मियो को जान से मारने की धमकी और जब्त सामान ले भाग थे माफिया
बैकुंठपुर
कोरिया जिला प्रशासन तमाम सख्ती इन कोल माफियाओ के सामने बौनी नजर आ रही है। बीते दिनो वन विभाग के कर्मियो पर हमले से लेकर उनकी जान से मारने की धमकी तक देने की बात सामने आने पर भी प्रशासन की सख्त कार्यवाई नही होने अब इनके हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। इन कोल माफियाओ के द्धारा आईजी सरगुजा के कठोर कार्यवाईयो के निर्देश के बावजूद माफियाओ के बावजूद कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखा कर बडे आराम से कार्य कर रहे है।
इन माफियाओ के द्धारा धड़ल्ले से दिन-दहाड़े चोरी को अंजाम दे रहे हैं। जिले में सालों से बंद पड़े सुरंगो के खुलने के बाद से बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के महिला और पुरुष कोयला चोरी करते हुए नजर देखे जा सकते हैं।
ग्रामीणो को मोहरा बनाकर करा रहे खनन
जानकारी के लिए बता दें कि मौके का फायदा उठाते हए कोयला तस्कर सक्रिय हो गए हैं और वे ये काम ग्रामीणों को चंद रुपये देकर करवाते हैं। बैकुंठपुर, चरचा और पटना थाना क्षेत्रो में इनकी सक्रियता देखी जा सकती है। जहा सैकड़ों की संख्या में बेखौफ होकर ग्रामीण कोयला चोरी करने खदान में पहुंचते है और बोरी में भर कर इक्टठा करते है। ग्रामीणों के कोयला चोरी करने की बात कोई नई नही है किन्तु प्रशासन के मौन सेे इनके हौसलो को पंख लग गये हैं। कोयला से भरे पहाडो से सटे डेढ दर्जन से अधिक गांव के ग्रामीण रोजाना लाखों रुपये का कोयला के वारे न्यारे किये जा रहे है।
शासन को हो रहा करोडो का नुकसान
जानकारी के मुताबिक क्षेत्र में कोयला का अवैध उत्खनन किया जा रहा है इनमें से ज्यदातर एरिया फॉरेस्ट क्षेत्र से सटा हुआ है। इन क्षेत्रों से कोयला उत्खनन कर ट्रक, ट्रैक्टर वह अन्य साधनों से श्रीनगर, बैकुंठपुर, सूरजपुर सहित आसपास के ईंट भट्ठों में अवैध कोयले की खपत की जाती है। जिससे हर वर्ष शासन को करोडो रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
कटोरा, कटकोना, झिलमिली और पाण्ड़वपारा से भी चोरी
जानकरो की माने तो विगत चार महिने से रोज एसईसीएल और खनिज विभाग को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार अफसर कोयला चोरी रोकने ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। जिले के कटोरा साइडिंग में एसईसीएल कटकोना और झिलमिली सहक्षेत्र के झिलमिली और पंड़ोपारा कोयला खदान से उत्पादित कोयले को ट्रेलरों के माध्यम से कोल ट्रांसपोर्टिंग कर लाकर स्टाक किया जाता है, जहां से मालगाड़ियों में लोड़ कर अन्यत्र स्थानों में भेजा जाता है। इन दिनों बड़ी मात्रा में कोयला कटोरा साइडिंग में रखा रहता है। क्षेत्र में एक-दो नहीं दर्जनों की संख्या की संख्या चोरी करने पहुंचते हैं। कोयला चोर रात में कटोरा साइडिंग से महज कुछ दूर पर पिकअप और ट्रैक्टर खड़ा कर कोयला चोरी करते हैं और दिन में साइकिल और बाइक से खुलेआम कोयला चोरी करते रहे हैं।
माफियाओ ने बांटे अपने-अपने खदान
पटना थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुरमा, अंगा, पूटा, 5 नंबर, कटकोना क्षेत्र में पड़ने वाले देवखोल, नांग डबरा, कटकोना पारा के जंगलों में एक नहीं बल्कि 10 की संख्या से भी अधिक छोटे-बड़े अवैध कोयला खदान संचालित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि कोयला चोर अपने अपने क्षेत्र के हिसाब से इन कोयला खदानों को आपस में बांट लिए हैं। इन कोयला खदानों से दिन-रात कोयला खुदाई कर हर रोज लाखों रुपए का कोयला चोरी किया जा रहा है। कोयला खुदाई करने कोयला चोरों ने बकायदा मजदूर लगाकर रखा है और चंद पैसों की लालच में ग्रामीण क्षेत्र के युवा बिना सुरक्षा के पहाड़ों में बने अवैध कोयला खदानों के सुरंग में घुसकर कोयला खुदाई करने का काम करते हैं।
इन स्थानो के ईटभटठो पर खपाया जा रहा कोयला
गौरतलब हो कि पंडोपारा, झिलमिली कोयला खदान से कटोरा साइड़िंग पहुंचने से पहले ट्रेलरों को रुकवाकर सोरगा, टेमरी, शिव प्रसादनगर मोड़, टेंगनी हास्पिटल के पास, गोबरी पुल के पास, गिरजापुर, करजी गांव में कटकोना कोयला खदान से कटोरा साइडिंग के बीच गोबरी जलाशय के पास, शिव मंदिर बरदिया, बरदिया गांव और चितमारपारा में बड़ी मात्रा में कोयला चोरी किया जाता है। इस काम में करीब सैकडो लोग और दर्जन भर पिकअप और टैक्टर वाहन शामिल रहते हैं, जो बैकुंठपुर, पटना, कुडेली, बुढार, भाडी, छिंदडाढ, तलवापारा, बासनपारा, डबरीपारा, कसरा सहित आसपास के गांवों के अलावा सोनहत, कटगोड़ी, भैंसवार क्षेत्र के अलावा दूरस्थ जिलों में चोरी का कोयला बेचने वाले कोयला चोरों के इशारों में अपनी जान जोखिम में डालकर कोयला चोरी करते हैं।

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