प्रथम सावन सोमवार पर जिलेभर के शिवमंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता…..प्रेमाशंकर महादेव मंदिर में भोग- भंडारे का आयोजन
तीसरे सोमवार जलाभिषेक के लिए छुरिरेश्वरगढ महादेव धाम पहुचेंगे कावडिये
चौथे सोमवार होगा सवा लाख पार्थिव शिव लिंगो का निर्माण, पूजन एवं विर्सजन
बैकुंठपुर।

सावन के पहले सोमवार पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। महादेव कं मंदिरो में जलाभिषेक के लिए भक्तों की कतार लगी रही। शिव मंदिरों में हर हर महादेव और बम बम भोले के जयघोष से गूंज रहे हैं। सावन का महीना शुरू हो गया है। ये पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। ऐसे में सावन के पहले सोमवार के दिन भर शिव मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी । माह का पहला सोमवार और भी खास होता है क्योंकि सोमवार पहले से ही भगवान शिव को समर्पित किया गया है।

मान्यता है कि इसी माह में देवी गौरी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और देवी गौरी को पत्नी रूप में स्वीकारा। साथ ही कहा जाता है कि हर साल देवों के देव महादेव इसी माह अपने ससुराल भी जाते हैं। ऐसे में यह पूरा माह बेहद पवित्र माना जाता है। इसलिए भक्त इस दिन व्रत और पूजा अनुष्ठान करते हैं।

बैकुंठपुर के प्रेमाबाग स्थित प्रेमशंकर महादेव मंदिर में देवरहा बाबा समिति के द्वारा भोग भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें समिति के अध्यक्ष शैलेशे शिवहरे, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष सुभाष साहू, पार्षद भानुपाल सहित सैकड़ो की तादाद में देवराहा बाबा समिति के सदस्य एवं श्रद्धालुओं ने भोग भंडारे का आनंद लिया।

शिवमंदिर प्रेमाबाग सुबह से उमडी भीड
शहर के सबसे पुराने और प्रतिष्ठत शिवमंदिर प्रेमाबाग में विशेष पूजा-अर्चना की गई। दिनभर श्रद्धालु जलाभिषेक किया और शाम को शिवलिंग का फूल, नारियल, बेलपत्तों से विशेष श्रृंगार किया गया। शाम को भक्तों को ठंडाई का प्रसाद वितरित किया । महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया इस पर्व को लेकर भक्ति से सराबोर शिवभक्तों में काफी उत्साह देखा गया। शिव भक्त ने स्नान आदि कर शिव जी का जलाभिषेक किया, महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन का पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के ही दिन भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस कारण शिव भक्त बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। सुबह से ही शिव मंदिर में भक्तों विशेषकर महिलाओ और नवयुवतियो की लंबी-लंबी कतारें जल चढाने के लिए देखी गई।
चरणतीर्थ पर हुआ शिवार्चन
प्रेमाबाग शिव मंदिर में विशेष पूजे का आयोजन पूरे शास्त्राथ विधि विधान से किया गया । मंदिरो के पुजारी के अनुसार भगवान शिव पर धतूरा पुष्प, बेलपत्र, श्वेत वस्त्रों और पुष्प की पंखुड़ियों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। महाशिवरात्रि की अर्धरात्रि में विशेष पूजा विधि विधान से किया गया। जिसमें पहले प्रहर में दूध से, द्वितीय प्रहर में गन्ने के रस से, तृतीय प्रहर में गिलोय से तथा चतुर्थ प्रहर में गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक किया गया।
इन स्थानों पर रहा मेला
विभिन्न स्थानों पर शिवालयो पर रूद्राभिषेक, पूजन, भजन, भण्डारा आदि आयोजन हुए। महाशिवरात्री के दिन शिव-मंदिर प्रेमाबाग, रमदईया धाम, एसईसीएल शिव मंदिर, झुमका शिव-मंदिर, जमगहना शिवालय, कटगोडी घाट शिव-मंदिर के अलावा अन्य कई क्षेत्रो में नागपंचमी मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें भारी संख्या में शिवभक्त अपने अराध्य के दर्शन कर अपनी मनोकामनाये मांगी।
तीसरे सोमवार जल ले छुरीगढ जायेगें कावडियॉ
बैकुंठपुर के प्रेमाबाग शिव मंदिर प्रांगण से गेज नदी से जल भरकर छुरीगढ धाम तक कांवड़ में जल लेकर सावन के तीसरे सोमवार को भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने कावड़िया जायेगे। देवराहा बाबा समिति के अध्यक्ष शैलेश षिवहरे ने बताया कि बैकुंठपुर से 13 किलोमीटर दूर स्थित छूरीगढ़ धाम तक लगभग पैदल जायेगे। इस बार कावड़ यात्रा का महत्व और बढ़ गया था इसी के मददेनजर पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध पहले से किये जायेगे। गौरतलब हो कि सावन का महीना हिन्दूओ में अपनी विशेष पहचान रखता है। इस दौरान व्रत, दान व पूजा-पाठ करना अति उत्तम माना जाता है। जिले में सावन की तीसरी सोमवारी पर क्षेत्र के विभिन्न शिवालयो में भक्तो ने शिवालयो में जाकर जलाभिषेक किया। बैकुंठपुर के शिव मंदिर के अलावा छुरीगढधाम, एसईसीएल शिव मंदिर, रमदईया धाम, जमगहना शिव मंदिर के अलावा जनकपुर के चांगमाता मंदिर, कटगोडी के शिव मंदिर, विभिन्न शिवालयों में हजारों की संख्या में भक्तो ने अपने अराध्य प्रभु भगवान भोलेनाथ के दर्शन का लाभ लेगे।
चौथे सोमवार सवा लाख शिव लिंगो का निर्माण
सावन के माहिना शिव भक्तो के लिए हमेशा से ही विषेश रहा है। इस बार देवराहा बाबा सेवा समिति के अध्यक्ष शैलेश शिवहरे ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी चौथे सोमवार को शिव मंदिर प्रागण में ही आचार्यो के सान्ध्यि में सवा लाख शिव लिंगो को निर्माण पवित्र काली मिटटी से किया जायेगा। जिसे बाद में विधि विधान से पूजा आदि करने के उपरान्त जल में विर्सजन कर दिया जायेगा। वही पर प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिर प्रांगण में भोग भंडारे का आयोजन कराया जा रहा है।





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