तनाव आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण बन रहा-डॉ़ प्रिंस जायसवाल
न्यू लाईफ में आत्महत्या रोकथाम दिवस पर कार्यक्रम आयोजित
बैकुुंठपुर।
न्यू लाईफ हेल्थ एण्ड एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित न्यू लाईफ इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग में छात्रों द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर कॉलेज परिसर में स्लाइड प्रेजेंटेशन एवं नाट्कीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का थीम चेंजिंग द नेरेटिव आन सुसाईड अर्थात आत्महत्या और इसकी वजहों के बारे में खुलकर बात करना है। ताकि इसके मामलों को कम करने में मदद् मिल सके।
विषय आत्महत्या रोकथाम एवं तनाव प्रबंधन कार्यक्रम में डॉ. प्रिंस जायसवाल ने कहा कि वर्तमान समय में तनाव आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। उन्होने कहा कि जब भी हम तनाव आते है। तब उसे किसी के साथ साझा नहीं करते है। या सही व्यक्ति के समक्ष उसे रख नहीं पाते है। जिससे व्यक्ति लगातार परेशान होता चला जाता है और में घृणित कदम उठा लेता है। कहा कि तनाव से बचने के लिए संगीत का सहारा लिया जा सकता है। तनाव में आने के बाद प्राकृतिक वादियों में समय व्यतीत करने का प्रयास करना चाहिए। चित्रकला करें, जिससे तनाव से मुक्त होकर मन रचनात्मक क्रिया की ओर चला जाए।

छात्रो को संबोधित करते हुए डॉ. प्रिंस ने कहा कि आत्महत्या से संबंधित विश्व और भारतीय आकड़ों के बारे में बताया कि कैसे युवा वर्ग में आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे है। कहा कि संवाद, संवेदनशीलता और सहयोग आत्महत्या रोकथाम के प्रमुख साधन हैं। इस व्याख्यान सह कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समाज में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्तियों पर रोकथाम के उपायों पर विचार-विमर्श करना था। साथ ही तनाव प्रबंधन की व्यावहारिक तकनीकों को साझा करना था। कार्यक्रम ने उपस्थित प्रतिभागियों को जीवन के प्रति नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं है। बल्कि जीवन जीने की कला है।

विदित हो कि वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइज़ेशन ने इस थीम को साल 2024 से 2026 तक के लिए चुना है। लोगों को यह संदेश देना कि आत्महत्या रोकी जा सकती है। उन्होने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत को प्रोत्साहित करना ताकि लोग मद्द लेने में हिचकिचाएं नहीं। परिवार और समाज में ऐसा माहौल बनाना जिससे व्यक्ति को सहारा और सकारात्मक ऊर्जा मिल सके। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाने की शुरूआत वर्ष 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन आई.ए.एस.पी. ने की थी। विश्व आत्महत्या दिवस का उद्देश्य आत्महत्या के बारे में बातचीत शुरू करना और यह दिखाना है कि इसकी रोकथाम संभव है।
न्यू लाईफ इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग के छात्र-छात्राओं द्वारा स्लाइड प्रेजेंटेशन एवं नाटकीय कार्यक्रम के माध्यम से आत्महत्या के लक्षण, जागरूकता एवं इसकी रोकथाम का कार्यक्रम कॉलेज परिसर में किया गया। प्राचार्य डॉ. अंजना सैम्यूल के द्वारा इसके कारण एवं बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी। इसे पुरे कार्यक्रम का आयोजन नर्सिंग ट्यूटर कोमल साहू के द्वारा एवं संस्था के प्रबंधन के मार्गदर्शन में किया गया।


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