प्रशिक्षण……बाघों के साक्ष्य की पहचान, प्राप्त डेटा का अवलोकन व ट्रैप कैमरा संचालन विधि की दी जानकारी

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बैकुंठपुर।

विश्व वन्यजीव कोष भारत द्धारा समय-समय पर छत्तीसगढ सहित देश भर के में वन कर्मचारियों को वन्यजीव अपराध निवारण, गश्त और मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी के तहत कोरिया वनमण्डल बैकुंठपुर अंतर्गत बाघ एवं अन्य वन्यप्राणियों के प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष व साक्ष्य की पहचान व ट्रैप कैमरा संचालन विधि आदि का प्रशिक्षण कार्यक्रम वन रक्षकों के कौशल को बढ़ाने और वन्यजीवों की सुरक्षा तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उनकी क्षमता को मजबूत करने के लिए आयोजित किए गया।

विभाग द्धारा दी गई जानकारी के अनुसार बुद्धवार को बाघ एवं अन्य वन्यप्राणियों के प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष व साक्ष्य की पहचान व ट्रैप कैमरा संचालन विधि आदि का प्रशिक्षण कोरिया वनमण्डल के बैकुंठपुर में वन प्रशिक्षण केन्द्र में विभाग के कर्मचारियों को दिया गया। इस प्रशिक्षण डब्ल्यू डब्ल्यू एफ इंडिया मध्य भारत भूक्षेत्र के प्रशिक्षक उपेन्द्र कुमार दुबे के द्वारा दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान वनमण्डलाधिकारी कोरिया, उपवनण्डलाधिकारी, वन परिक्षेत्राधिकारी बैकुंठपुर, सोनहत, देवगढ़ तथा सभी वन परिक्षेत्रो के कर्मचारी उपस्थित थे।

प्रशिक्षण में उपेन्द्र कुमार दुबे वन्यजीव साक्ष्य एवं व्यवहार, बाघ का इतिहास एवं उनकी संख्या तथा पहचान के बारे में विस्तृत रूप से समझाते हुए बताया कि प्रशिक्षण का उददेश्य वन कर्मचारियों के कौशल और क्षमताओं को बढ़ाना। वन्यजीव अपराधों को रोकना और वन्यजीवों के अवैध शिकार पर अंकुश लगाना। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटना। प्रकृति के संरक्षण और वन संसाधनों के सतत प्रबंधन में वन कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाना है।

उन्होने कर्मियो वनमण्डल अंतर्गत परिक्षेत्र बैकुंठपुर एवं गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के समीप परिक्षेत्र सोनहत के कर्मचारियों को बाघ के प्रजाति की पहचान, पदचिन्हों के प्रकार एवं पहचान, उनके गतिविधि का अनुश्रवण, चिन्हों, साक्ष्यों की पहचान, सर्वेक्षण के साथ-साथ वनों में वन्यप्राणियों की गणना के संबंध में जानकारी प्रदाय की एवं ट्रैप कैमरा का वनों में उपयोग के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई ।

नई तकनीको से कर्मियो को कराया अवगत

बाघों की गिनती और निगरानी में मैप और कैमरा तकनीक के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें कैमरा ट्रैप लगाना, उनके द्वारा ली गई तस्वीरों का विश्लेषण करना, बाघों के अद्वितीय धारियों के पैटर्न की मदद से उनकी पहचान करना, और प्रशिक्षित वन कर्मचारी द्वारा इस डेटा का उपयोग करके बाघों की उपस्थिति और आबादी का अनुमान लगाना शामिल है। इस प्रशिक्षण में जीपीएस उपकरणों और सॉफ्टवेयर के उपयोग की भी जानकारी दी गई।

बाघों की पहचान व डेटा का अवलोकन

बाघों के शरीरों पर बनी धारियाँ मनुष्यों के फ़िंगरप्रिंट की तरह अद्वितीय होती हैं, और प्रशिक्षण में इन धारियों के पैटर्न के आधार पर व्यक्तिगत बाघों की पहचान करना सिखाया गया। प्रशिक्षण में कैमरा ट्रैप से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग करके बाघों की गिनती और उनके आवास में उनकी उपस्थिति का अनुमान कैसे लगाया जाता है। बाघों के व्यवहार, भोजन की तलाश के पैटर्न, और उनके आवास के बारे में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए कैमरा ट्रैप डेटा का विश्लेषण कैसे किया जाता है। कैमरों से प्राप्त बड़ी मात्रा में छवियों और वीडियो का विश्लेषण करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिसमें मैनुअल और स्वचालित तरीके शामिल हैं।

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