फरमान……जिले के तीनो निकायो में जल की जांच रिपोर्ट अब पोर्टल पर करना होगा अपलोड
सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी
बैकुंठपुर।
जिले के तीनो नगरीय निकायों को अब पेयजल गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट विभागीय पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। शासन ने अब पहले के तय नियम के अनुसार 15 दिनों में पेयजल परीक्षण की रिपोर्ट गूगल शीट के माध्यम से भेजने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।
शासन ने नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में विभाग ने सभी क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को निर्देश जारी किए हैं। यदि कोई निकाय समय पर जल परीक्षण रिपोर्ट अपलोड नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
सभी नगर निगम आयुक्तों, संयुक्त संचालकों और नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को इसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी नगरीय निकायों को विभागीय पोर्टल पर लागिन कर वाटर टेस्टिंग मेन्यू में नियमित रूप से जल परीक्षण की जानकारी दर्ज करनी होगी।

जल जनित बीमारी से बचने के लिए शुद्ध पेयजल का सेवन जरुरी – डॉ. प्रशांत सिंह
सरकार ने कहा है कि लोगो को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना नगरीय निकायों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बारिश के मौसम में दूषित पानी और जलभराव के कारण टाइफाइड, हैजा (कोलरा), डायरिया, पीलिया (जान्डिस) जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं, जिससे पेट और लिवर से जुड़ी समस्याएं होती हैं। जबकि जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि बरसात के दिनो में शहरी क्षेत्रो में पेयजल लाइनों में रिसाव होने पर दूषित पानी के मिलने की आशंका रहती है। इसलिए लोगो को जल जनित बीमारी से बचने के लिए शुद्ध पेयजल का सेवन करना चाहिए। बेहतर होगा कि उसे उबाल कर सेवन करें।

बढे दूषित जल से बैक्टीरिया और वायरस के मरिज – डॉ. आयुष जायसवाल
जिला अस्पताल बैकुंठपुर के अस्पताल अधिक्षक डॉ. आयुष जायसवाल ने बताया कि इस समय ज्यदातर मरीज जो अस्पताल आ रहे हैं उनमें दूषित जल पीने से बैक्टीरिया और वायरस शरीर में पहुंचकर आंतों को संक्रमित कर देते हैं, जिससे दस्त, उल्टी, पेट दर्द, फूड प्वाइजनिंग और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। वर्तमान में जिला अस्पताल सहित जिले के सीएचसी व पीएचसी में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।


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