भांडी नाली निर्माण में भ्रष्टाचार पर उठे गंभीर सवाल……..मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शिकायत के बाद भी जांच पर संदेह, ग्रामीणों ने कहा, क्या भ्रष्टाचार बचाने के लिए हुई खानापूर्ति?
बैकुंठपुर।
जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत भांडी में 15वें वित्त आयोग जिला पंचायत सदस्य निधि से कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि निर्माण कार्य में निर्धारित मात्रा से कम सरिया लगाया जा रहा है, कार्य स्थल पर सूचना पटल नहीं लगाया गया है तथा नाली के बेस में मुरूम, रेत या डस्ट की उचित परत डाले बिना ही ढलाई शुरू कर दी गई। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बाद 27 जुलाई को कार्यपालन अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, बैकुंठपुर द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि कार्य स्थल पर सूचना पटल नहीं पाया गया, जिसे तत्काल लगाने के निर्देश दिए गए। साथ ही रिपोर्ट में सरिया की मात्रा सही होना बताया गया तथा तेज बारिश के कारण नाली के बेस का कुछ हिस्सा खराब होने पर उसे हटाकर पुनः ढलाई कराने के निर्देश देने की बात कही गई।
जांच रिपोर्ट और मौके की स्थिति में विरोधाभास के आरोप
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच रिपोर्ट में जिन बिंदुओं को सही बताया गया है, मौके की वास्तविक स्थिति उनसे मेल नहीं खाती। उनका कहना है कि नाली के बेस की ढलाई में कई स्थानों पर सरिया स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जिससे ढलाई की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा बेस में गिट्टी भी बाहर दिखाई देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि समाचार प्रकाशित होने के बाद कुछ दूरी तक दो सरिया के स्थान पर तीन सरिया लगाए गए, लेकिन अधिकांश हिस्से में पहले की तरह ही निर्माण किया गया। उनका आरोप है कि केवल जांच के दौरान दिखाने के लिए सीमित हिस्से में बदलाव किया गया।
बेस निर्माण की जांच नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत का प्रमुख बिंदु यह था कि नाली निर्माण से पहले बेस में मुरूम, रेत या डस्ट नहीं डाली गई थी। उनका आरोप है कि जांच के दौरान इस महत्वपूर्ण विषय की तकनीकी जांच नहीं की गई और केवल औपचारिक निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर भी उठे सवाल
सूत्रों के हवाले से ग्रामीणों का आरोप है कि जिला पंचायत सदस्य निधि से स्वीकृत यह कार्य कथित रूप से ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग या जिला पंचायत सदस्य की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराते हैं। यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं होगी और केवल औपचारिक कार्रवाई होगी, तो लोगों का इस व्यवस्था से विश्वास कम हो सकता है। उनका कहना है कि यदि भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को बढ़ावा मिल सकता है। अब ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र तकनीकी टीम से दोबारा जांच कराई जाए, जिसमें सरिया की मात्रा, बेस निर्माण की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री तथा स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप कार्य होने की विस्तृत जांच की जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।


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