सड़कों पर मवेशियों का डेरा, चोट खा रहे राहगीर

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बैकुंठपुर।

जिले में रोका-छेका अभियान धरातल पर अब कही नजर नही आ रहा है। हातल तो यह है कि उल्टे मवेशियों ने ही सड़कों को रोक और छेक रखा है। 24 घण्टे मुख्य मार्ग पर मवेशियों के द्धारा डेरा जमा लिया जाता है। उल्लेखनीय है कि गत महिनो में रोका-छेका अभियान की शुरुआत की गई थी जिसके तहत नगरिय निकायो व ग्रामीण अचंल में ग्राम पंचायत को जिम्मेदारी दी गई है। कहने को तो योजना जारी है लेकिन इसका असर कहीं भी दिखाई नहीं पड़ रहा। वहीं सड़कों और खेतों में अभी भी हर ओर मवेशी जमे हुए हैं। आप जिले भर की किसी भी सड़क व खेत जगह पर चले जाइए। वहां जानवरो के झुंड नजर आ ही जाएगें।

आये दिन हो रहे हादसे

बरसात के दिनो में बीच सड़क पर पशुओं के जमावड़े से वाहन चालकों के साथ राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रात के समय वाहनों से पशुओं के टकराने की घटनाएं आम हो गई हैं। वहीं, दिन में पशुओं के सड़क पर होने से की समस्या उत्पन्न होती है। इससे यातायात प्रभावित होता है। वाहन चालकों के अनुसार, छुट्टा पशुओं के कारण उन्होंने वाहनों की रफ्तार कम कर दी है। सड़कों पर इधर-उधर घूमने से वाहन चालकों को परेशानी तो होती ही है, अक्सर कोई न कोई पशु हाइवे पर बीच सड़क में ही बैठकर जुगाली करता नजर आता है। ऐसे में किसी के लिए भी संभलकर चलना आसान नहीं रह जाता। इस स्थिति में कई बार हादसे होते-होते बचे है। सड़कों पर छुट्टा पशुओं से केवल बाइक या साइकिल सवार ही नहीं बड़े वाहन चालक परेशान होते हैं। आए दिन वाहन दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई वाहन चालक-सवार छुट्टा पशुओं की चपेट में आने से अपनी जान भी गंवा चुके हैं।

सरकार की योजना हुई फेल

बारिश होते ही मिट्टी गीली होने के बाद मवेशी बीच सड़क को सुखी पाकर वहां ठिकाना बना लेते हैं। सड़क पर मवेशियों के बैठने के कारण हर तरफ गोबर भी बिखरा पड़ा है जिससे सड़कों की अलग दुर्गति हो रही है। यहां मुख्य सड़क और सभी सहायक सड़कों पर इसी तरह मवेशियों का कब्जा है। गांव में भी कोई बदलाव नहीं दिख रहा। ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि सरकार की महत्वकांक्षी योजना रोका छेका आखिर चल कहां रही है। उन्होने कहा कि बैकुंठपुर के जितने भी पशु पालक है वह अपने पालतू गाय बैलों को रोड में ऐसे ही मरने के लिए छोड़ दिए हैं ।
नगर पालिका इन आवारा गाय बैलों की कोई व्यवस्था नहीं कर पा रही है नपा भी केवल गौ सेवकों के भरोसे है गौ सेवकों के बहुत बोलने पर नगर पालिका के द्वारा रोड में बैठे जो गाय बैल बैठे रहते हैं उन्हें किनारे करने के लिए एक दो तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है पर यह पर्याप्त नहीं है कर्मचारी भी केवल अपनी फॉर्मेलिटी करके चल देते हैं जब तक इनके लिए कोई ठोस पहल इनक रखने की कोई व्यवस्था नगरपालिका नहीं करती है तो यह गाय बैल एक्सीडेंट से रोज ऐसे ही तिल तिल कर मरते रहेंगे ।

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