गैरजिम्मदार अफसरो की भर्राशाही से शासन की सख्ती कोरिया में नाकाम…….अमानक खाघ सामग्री की नही धर पकड

Estimated read time 1 min read

एनालॉक पनीर पर शासन के प्रतिबंध……बावजूद जिले में करवाई नही…..दूकानो से एक भी सैम्पल नही लिया…..विभाग की विक्रेताओ पर क्यो की इतनी मेहरबानी….. जिलेभर में निगरानी नही……पॉच दूकानो में विभाग की सूखी दस्तक, दे जिम्मेदारी की पूरी……

बैकुंठपुर।

छत्तीसगढ़ शासन ने जुलाई के अंत में स्वास्थ्य सुरक्षा के मद्देनजर एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन और खुदरा बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। जबकि कोरिया जिले में प्रशासन व खाद्य विभाग द्वारा अब तक किसी प्रकार की सख्त व छापेमार कार्रवाई नही की गई है। जिले के खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग की सुस्ती के कारण अब तक जिले में कार्यवाई तो छोडिए जॉच के लिए सैम्पल तक नही लिया गया है।

गौरतलब हो कि शासन के निर्देश और प्रतिबंध के दायरे में राज्य में पाम ऑयल, मिल्क पाउडर और वनस्पति वसा से बनने वाले एनालॉग पनीर की बडी मात्रा में उत्तर प्रदेश के बनारस से बैकुंठपुर सहित जिले के आस पास में प्रतिदिन लाया जा रहा है। वही पर जिले के अभिहित अधिकारी खाघ एवं औषधि प्रशासन नीलम ठाकुर की माने तो उनकी टीम के द्धारा रविवार को 5 से 6 दुकानो में जाकर दुकानदारो से पूछा गया कि आप नकली सामन बेचते हैं या नही। बडी अजिब बात है ये अधिकारी की कैंसे टाइट हो विभाग जब विभाग के जिम्मेदार महिना टैक्स वसूलते हो इन दूकानो से फिर कार्यवाई किस मूॅह से करेंगे।

रविवार को एनालॉग पनीर के अवैध परिवहन के मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने राजहंस ट्रैवल्स के संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद से कोरिया और एमसीबी जिले तक चलने वाली वे बसे जो उत्तर प्रदेश के बनारस, बिहार के पटना और झाारखण्ड के रॉची से आवागमन कर रही उनमें हडकंप हैं। जबकि पहले भी एनालॉग पनीर की बडी खेप पटना, बैकुंठपुर और चरचा में बडी मात्रा में उतरती रही है। विभाग के जिम्मेदार इस बात से अनभिज्ञ हो एैसा नही है सबको सब सच्चाई पता है।

राज्य शासन ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 30(2)(क) के तहत पूरे छत्तीसगढ़ में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग (एनालॉग पनीर) तथा अन्य गैर-दुग्ध लेकिन दुग्ध उत्पाद जैसे खाद्य पदार्थों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया है। यह आदेश 31 जुलाई को राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ लागू हो गया है।

जिलेभर में नही है निगरानी

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी के कारण शासन का यह अभियान केवल दिखावे जैसा प्रतित हो रहा है। बेहतर होता कि जिले में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी बस, मालवाहक वाहन, जीप समेत अन्य परिवहन साधनों की नियमित और आकस्मिक जांच की जाती। ताकि प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की आवाजाही रोक लगाई जा सके।

जॉच सैम्पल लिया न नोटिस, जिम्मेदारी की पूरी

कोरिया जिले के अभिहित अधिकारी, खाघ एवं औषधि प्रशासन नीलम ठाकुर की टीम के द्धारा रविवार को 5 से 6 दुकानो में जाकर दुकानदारो से पूछा गया कि आप नकली सामन बेचते हैं या नही। बडी अजिब बात है ये अधिकारी की कैंसे टाइट हो विभाग जब विभाग के जिम्मेदार महिना टैक्स वसूलते हो इन दूकानो से फिर कार्यवाई किस मूॅह से करेंगे।
विभाग ने डेयरी उत्पादों के थोक एवं खुदरा विक्रेताओं तथा अन्य खाद्य कारोबारियों को बीना नोटिस जारी किए ही आवश्यक निर्देश देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। कारोबारियों से कहा गया है कि वे वैध स्रोत, क्रय बिल और आपूर्तिकर्ता की जानकारी के बिना किसी भी प्रकार का पनीर या दुग्ध उत्पाद न खरीदें और न बेचें।

विभाग ने जन जागरण करना भी नही समझा जरुरी

अम्बिकापुर में विभाग द्धारा बडी खेप पकडे जाने के बाद भी कोरिया जिले में विभाग के जिम्मेदारो द्धारा अब तक बस संचालकों, ट्रांसपोर्टरों और परिवहन एजेंसियों से प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के परिवहन न करने की कोई अपील जारी कराना जरुरी नही समझा गया । वही पर आम नागरिकों से भी अनुरोध करने की जरुरत नही समझी गई है। जबकि शासन के अनुसार कहीं भी प्रतिबंधित या संदिग्ध एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन या बिक्री की जानकारी मिलने पर तत्काल विभाग को सूचित करने के लिए जन जागरण करने की जिम्मेदारी विभाग की है।

क्या होता है एनालॉग पनीर

एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है जो देखने, छूने और उपयोग में सामान्य पनीर जैसा लगता है, लेकिन यह पूरी तरह या मुख्य रूप से दूध से नहीं बनाया जाता। इसमें दूध की जगह या उसके साथ वनस्पति तेल जैसे पाम ऑयल आदि, स्टार्च, प्रोटीन पाउडर, इमल्सीफायर, फ्लेवर और अन्य खाद्य योजक मिलाकर पनीर जैसा उत्पाद तैयार किया जाता है। इसका उपयोग अक्सर लागत कम करने के लिए किया जाता है।

शरीर पर इस तरह करता सकता है नुकसान

जिला अस्पताल बैकुंठपुर के अस्पताल अधिक्षक डॉ. आयुष जायसवाल का इस सबंध कहना है कि अधिक मात्रा में संतृप्त वसा या पाम ऑयल होने पर हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल़ सकता है। मिलावटी या खराब गुणवत्ता वाले उत्पाद से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है। संवेदनशील लोगों में एलर्जी या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होने कहा कि बेहतर होगा कि किसी भी प्रकार की खाघ सामग्री लेने से पहले लोग अपने आप को जागरुक, समझदार और सजग रहें।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours