मानव सेवा की मिशाल……समाज के अनुकरणीय लक्ष्मी बोले जन्मदिन पर रक्तदान जरुरतमंदो के लिए मेरा उपहार
लक्ष्मी जायसवाल ने कहा कि ईश्वर ने जो मानव जीवन दिया है, उसे मानवता की सेवा में समर्पित करना चाहिए। उन्होंने नेत्रदान और अंगदान का भी प्रण लिया है। वे जल्द ही इसके लिए कागजी कार्यवाई करगें।
बैकुंठपुर।
जन्मदिन के अवसर पर 36वीं बार रक्तदान करना एक बेहद प्रेरणादायक और समाज के लिए अनूठा उपहार है। यह कार्य न केवल जरूरतमंदों की जान बचाता है, बल्कि समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति एक मजबूत संदेश भी देता है। जन्मदिन पर रक्तदान कर समाज को संदेश देने का कार्य कोरिया जिले के बैकुंठपुर में व्यवसाय करने वाले ने दिया। जन्म दिन के अवसर पर जीवनदान के रूप में देखते हुए लक्ष्मी जायसवाल ने 35वीं बार रक्तदान कर मानवता की सेवा का उदाहरण पेश किया।
श्री जायसवाल ने कहा कि रक्तदान केवल जरूरतमंदों की मदद नहीं, बल्कि उनसे खून का रिश्ता जोड़ने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा, अपनी रगों का चंद कतरा देकर मैंने कई अनजान लोगों के साथ अटूट खून का रिश्ता कायम किया है। उन्होने बताया कि रक्तदान को महादान कहा गया है, लेकिन समय पर रक्त उपलब्ध न होने के कारण आज भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है। वे वर्ष 2001 में उन्होंने जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने का संकल्प लिया। आज 25 वर्षो से वे लगातार रक्तदान करते आ रहे हैं।
लक्ष्मी जायसवाल ने बताया कि हर वर्ष अपने जन्मदिन पर रक्तदान करने और आजीवन इस कार्य का संकल्प लिया है। इसके साथ ही उन्होंने नेत्रदान और अंगदान का भी प्रण लिया है। उन्होनेे कहा कि ईश्वर ने जो मानव जीवन दिया है, उसे मानवता की सेवा में समर्पित करना चाहिए। उनका यह समर्पण निस्संदेह प्रेरणादायक है और समाज के लिए मिसाल पेश करता है।


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