फर्जी अधिकारी बन बीमा पॉलिसी नियमित कराने के नाम पर 2.60 लाख की ऑनलाइन ठगी
आरोपियों ने अलग-अलग मदों में कराए तीन भुगतान, रकम लेने के बाद मोबाइल नंबर बंद
बैकुंठपुर।
कोरिया जिले के पटना थाना में दर्ज अपराध एसबीआई की बीमा पॉलिसी नियमित कराने के नाम पर पटना निवासी एक व्यक्ति से कथित तौर पर 2,60,988.60 की ऑनलाइन ठगी किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। मामले में मिली जानकारी की माने तो पीड़ित कॉन्सटानटीन तिर्की, निवासी ग्राम पटना, थाना पटना, जिला कोरिया ने पुलिस थाना पटना में आवेदन देकर मामले में कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
पीड़ित के अनुसार उसकी एसबीआई लाईफ इंश्योरेंस पॉलिसी का एक प्रीमियम मिस हो गया था। इसी दौरान उसे मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क कर बताया गया कि उसकी बीमा पॉलिसी ब्लॉक हो गई है और उसे नियमित कराने के लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। बातचीत के दौरान आरोपियों ने कथित रूप से खुद को बीमा एवं बैंक से जुड़े अधिकारी बताते हुए अलग-अलग मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए।
शिकायत के मुताबिक पहले एक महिला ने खुद को रायपुर से अंजली ठाकुर बताते हुए पॉलिसी से संबंधित जानकारी दी और एक अन्य व्यक्ति से संपर्क करने को कहा। इसके बाद बातचीत करने वाले व्यक्ति ने खुद को राजीव रंजन बताया। पॉलिसी की फाइल तैयार करने और उसे नियमित कराने के नाम पर पीड़ित से 5 दिसंबर 2025 को 61,000 फोन-पे के माध्यम से जमा कराया गया।
इसके बाद कथित रूप से बैंक प्रक्रिया और जीएसटी के नाम पर दोबारा राशि मांगी गई। शिकायत के अनुसार 19 जनवरी 2026 को 99,989.40 तथा 3 फरवरी 2026 को एनईएफटी, एनओसी और अन्य खर्च के नाम पर 99,999.20 का भुगतान कराया गया। इस प्रकार तीन भुगतानों में पीड़ित से कुल 2,60,988.60 की राशि ली गई।
पीड़ित का कहना है कि भुगतान करने के बाद जब उसने संबंधित व्यक्तियों से दोबारा संपर्क किया तो उनकी बातचीत से उसे संदेह हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी की गई है। इसके कुछ समय बाद कथित रूप से संबंधित मोबाइल नंबर बंद हो गए। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि आरोपियों ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर फर्जी नामों का इस्तेमाल करते हुए उससे रकम ठगी।
मामले में पुलिस के समक्ष दिए आवेदन में संबंधित मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन भुगतान से जुड़े विवरण के आधार पर जांच कर आरोपियों की पहचान करने तथा रकम की बरामदगी और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। प्रकरण में धारा 66 डी आईटी एक्ट एवं धारा 318(4) बीएनएस का उल्लेख किया गया है। पुलिस द्वारा मामले में उपलब्ध मोबाइल नंबर, भुगतान लिंक, बैंक/यूपीआई लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच किए जाने के बाद ही आरोपियों की वास्तविक पहचान और घटना की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




+ There are no comments
Add yours