न्यू लाईफ में साइबर सुरक्षा जागरूकता पर कार्यशाला का आयोजन……छात्रो को साइबर अपराधों से बचाव के बताए उपाय व सतर्कता और सजगता का दिया संदेश

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छात्रो को साइबर अपराधों से बचाव के बताए उपाय व सतर्कता और सजगता का दिया संदेश

बैकुंठपुर।

आधुनिक तकनीक के इस युग में डिजिटल माध्यम जहां जीवन को सरल, सुगम और सुविधाजनक बना रहे हैं, वहीं साइबर अपराधों का बढ़ता जाल समाज के लिए गंभीर चुनौती भी बनता जा रहा है। इसी चुनौती के प्रति युवाओं और विद्यार्थियों को सजग करने तथा साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से ‘न्यू लाईफ’ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित ‘न्यू लाईफ’ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, बैकुंठपुर में साइबर जन-जागृति अभियान के अंतर्गत जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में थाना बैकुंठपुर, जिला कोरिया से प्रधान आरक्षक दीपक पाण्डेय एवं उप निरीक्षक भावना वर्मा ने विशेष रूप से उपस्थित होकर संस्था प्रबंधन, शिक्षकों तथा नर्सिंग विद्यार्थियों को साइबर अपराधों की प्रकृति, उनके संभावित खतरों और उनसे बचाव के प्रभावी उपायों से अवगत कराया। प्रशिक्षकों ने कहा कि डिजिटल दुनिया में थोड़ी-सी असावधानी व्यक्ति को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी और सामाजिक संकट में भी डाल सकती है। इसलिए इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग करते समय विवेक, संयम और सतर्कता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।

प्रधान आरक्षक दीपक पाण्डेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से किसी अनजान व्यक्ति से अत्यधिक निकटता अथवा पहचान बनाना कई बार परेशानी का कारण बन सकता है। फेसबुक सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप का उपयोग करते समय अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। उन्होंने अनजान नंबरों से आने वाले कॉल, संदिग्ध संदेश और आकर्षक प्रलोभनों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी, पासवर्ड अथवा अन्य गोपनीय विवरण किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को साइबर प्रहरी व्हाट्सऐप समूह से जुड़ने के लिए भी प्रेरित किया, ताकि साइबर अपराधों के प्रति निरंतर जागरूकता बनी रहे और समय-समय पर मिलने वाली आवश्यक सूचनाओं एवं सावधानियों से परिचित रहा जा सके।

उन्होंने कहा कि सजग नागरिक ही सुरक्षित डिजिटल समाज की आधारशिला रख सकता है। उप निरीक्षक भावना वर्मा ने साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल सहायता प्राप्त करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर फ्रॉड का शिकार होता है तो बिना समय गंवाए 1930 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहते हुए किसी भी प्रकार की परेशानी या संवेदनशील जानकारी पुलिस तक पहुंचाने में संकोच नहीं करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर अपनी बात गोपनीय रूप से भी पुलिस तक पहुंचाई जा सकती है।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को अभिव्यक्ति ऐप के माध्यम से भी अपनी समस्याओं और शिकायतों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने के संबंध में अवगत कराया गया। प्रशिक्षकों ने कहा कि तकनीक का सदुपयोग समाज को सुरक्षित और सशक्त बनाने का माध्यम बन सकता है, लेकिन इसके लिए प्रत्येक नागरिक को डिजिटल अनुशासन और साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांतों का पालन करना होगा। कार्यशाला के समापन अवसर पर संस्था प्रबंधन की ओर से पुलिस विभाग से उपस्थित प्रशिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

संस्था की ओर से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार के लालच, प्रलोभन अथवा गलत तरीके से प्राप्त होने वाले लाभ के पीछे न भागें और स्वयं को किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से दूर रखें। कार्यक्रम में ‘न्यू लाईफ’ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग के प्राचार्य, समस्त नर्सिंग शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यशाला ने विद्यार्थियों के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता की नई चेतना जगाते हुए यह संदेश दिया कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है।

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