वैध कागज होने के बाद भी 9 महीने से बस सीज, 33 मिनट में दो जगह दो चालान – RTO प्रयागराज की कार्यशैली पर हाईकोर्ट सख्त..!!!

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वैध कागज होने के बाद भी 9 महीने से बस सीज, 33 मिनट में दो जगह दो चालान – RTO प्रयागराज की कार्यशैली पर हाईकोर्ट सख्त..!!!

नियम विरुद्ध किए गए चालान को हाई कोर्ट प्रयागराज ने किया रद्द,, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर एवं आरटीओ को बस चलने लायक बनाकर वापस करने के लिए निर्देश,,कहा कि 30 नवंबर को आकर बताओ बस किसने और क्यू जप्त की थी.???

ट्रांसपोर्ट कमिश्नर एवं आरटीओ को दिया निर्देश कहा कि चालान करने वाले के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही क्या किया उसकी भी जानकारी आगामी तारीख को देनी होगी हाई कोर्ट को.!!!

प्रयागराज।

21 फरवरी 2026 – 33 मिनट में दो अलग-अलग जगह चालान…पहली बार में बस जप्त तो दूसरा चालान कैसे.???

याचिकाकर्ता के अनुसार पहला चालान 21 फरवरी 2026 को सुबह 06:21 बजे नवाब युसूफ रोड पर अतिरिक्त सीट का हवाला देकर काटा गया और दूसरा चालान उसी दिन सुबह 06:54 बजे महात्मा गांधी मार्ग, जॉर्ज टाउन पर परमिट शर्त उल्लंघन का हवाला देकर काट दिया गया। याचिका में तर्क है कि पहला चालान काटते ही बस को कब्जे में ले लिया गया था, तो 33 मिनट बाद वह दूसरी जगह पर चलती हुई कैसे मिली। बस में छत्तीसगढ़ से खागा जा रहे पर्यटक सवार थे। परमिट पर 40 सीट (11 स्लीपर + 29 सिटिंग) दर्ज है और चालान तिथि पर परमिट वैध था। आरोप यह भी है कि जब्ती के समय कोई सीजर मेमो नहीं दिया गया।

9 महीने में बस कबाड़ बनी

21 फरवरी से लेकर 28 सितंबर तक बस रोडवेज परिसर में खड़ी रही। इस दौरान बस के टायर, बैटरी, सीटें और निकालने योग्य सारा सामान गायब हो गया। बस छुड़ाने के लिए हर स्तर पर गुहार लगाई, सुनवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट आना पड़ा।

28 सितंबर और 7 अक्टूबर – कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता को अंधेरे में रखा गया.!!!

28 सितंबर 2026 को कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता को अंधेरे में रखा गया है। कोर्ट ने संभागीय परिवहन अधिकारी (RTO), प्रयागराज या सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO – प्रवर्तन), प्रयागराज में से सक्षम अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से फाइल सहित हाजिर होने का आदेश दिया। 7 अक्टूबर 2026 को दोनों अधिकारी कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट ने पूछा कि पहले चालान के कुछ मिनट बाद ही दूसरे स्थान पर दूसरा चालान और सीज की कार्रवाई क्यों की गई, इस पर अधिकारियों ने जवाब के लिए समय मांगा। कोर्ट ने 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे बस का निरीक्षण कराने और निरीक्षण का नोट तैयार करने का आदेश दिया।

कोर्ट के निर्देश पर हुए निरीक्षण में चोरी का हुआ खुलासा.!!!

निरीक्षण में सामने आया कि बस के दरवाजे के ताले, बैटरी और कुछ स्लीपर गद्दे गायब हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि 28 सितंबर 2026 को तो बस के टायर भी गायब थे, अब बस पर दूसरे टायर लगा दिए गए हैं। कोर्ट ने माना कि निरीक्षण में बस में चोरी हुई है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

4 नवंबर – कोर्ट ने आरटीओ प्रयागराज के संबंधित अधिकारियों को दोषी माना.!!!

जब्ती के अधिकार पर राज्य पक्ष ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 207 का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि बस को जब्त करने और बिना अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लेख किए चालान जारी करने के बाद वह प्राधिकारी की हिरासत में रही, हिरासत में बस में चोरी हुई, अतिरिक्त सीटों का आरोप भी अधिकारी साबित नहीं कर सकते क्योंकि बस को जब्त करने के बाद उसे सबूत के रूप में सुरक्षित नहीं रखा गया, अधिकारी स्पष्ट रूप से दोषी हैं, उन्होंने मनमाने तरीके से काम किया है और धारा 207 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि RTO अधिकारियों ने भ्रष्टाचार, घूसखोरी और मनमानी के चलते पक्षपातपूर्ण, एकतरफा और असंवैधानिक कार्रवाई की है, जिसमें मोटी रकम देकर जेब भरने वालों को छोड़ा जाता है और रकम न देने वाले बस मालिकों को निशाना बनाया जाता है हालांकि चालान करने वाले अधिकारी को विभाग ने पहले ही भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड कर दिया है वह अभी लखनऊ के मुख्य कार्यालय में अटैच है.!!!

कोर्ट का क्या है अंतिम आदेश…???

कोर्ट ने दोनों चालान रद्द कर दिए और परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश और संभागीय परिवहन अधिकारी (RTO), प्रयागराज को निर्देश दिया कि वे बस को चलने योग्य स्थिति में बहाल करें, उसके बाद बस को फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए पंजीकरण प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, फिटनेस प्रमाणन के बाद परमिट के नवीनीकरण के लिए याचिकाकर्ता आवेदन करेगा और इस पूरी प्रक्रिया का पालन तीन सप्ताह के भीतर यानी 25 नवंबर 2026 तक किया जाए। याचिकाकर्ता को इस आदेश की वेबसाइट प्रति परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश और संभागीय परिवहन अधिकारी (RTO), प्रयागराज और पंजीकरण प्राधिकारी को भेजने के अलावा और कुछ नहीं करना है।

30 नवंबर को फिर सुनवाई.!!!

मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। कोर्ट ने मामले को 30 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया है। उस दिन परिवहन आयुक्त, उत्तरवो प्रदेश और संभागीय परिवहन अधिकारी (RTO), प्रयागराज को बताना होगा कि बस को जब्त करने वाले कर्मियों की पहचान और उनका विवरण क्या है, उनके खिलाफ राज्य की कार्रवाई का विवरण क्या है और इस आदेश को लागू करने में कितना खर्च हुआ और यह पैसा कैसे उपलब्ध कराया गया।

9 महीने की कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट के इस आदेश से स्टार टूर एंड ट्रेवल्स छत्तीसगढ़ के बस मालिक को न्याय की उम्मीद जगी है। अब सबकी नजर 25 नवंबर तक के पालन और 30 नवंबर की सुनवाई पर है।

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