Baikunthpur @ Tahkikat News
भारतीय जनता पार्टी के जिले के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री व चिकित्सा के लिए लोगो में अपनी विषेष पहचान रखने वाले भैया लाल राजवाडे का कहना है कि प्रदेश में सन् 2016 से शुरू हुए जनऔषधि केंद्रों पर लगते जा रहे ताले के लिए प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा है कि महंगी ब्रांडेड दवाइयों से बेहाल लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश में शुरू किए गए जनऔषधि केंद्र लगातार बंद हो रहे हैं। प्रदेश सरकार राजनीतिक दुर्भावना के चलते लोगों के स्वास्थ्य और सस्ते इलाज के प्रति पूरी तरह लापरवाह हो चली है और केंद्र सरकार की इस महती योजना को विफल करने के षड्यंत्र पर आमादा है।
उन्होने कहा कि सस्ती जेनेरिक दवाइयाँ मुहैया कराने के लिए शुरू किए गए इन केंद्रों में कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने षड्यंत्रपूर्वक कभी इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि इन केंद्रों में कभी पूरी और सस्ती दवाएँ ज़रूरतमंदों को मिल सकें। इन जनऔषधि केंद्रों के लिए प्रदेश सरकार ने न तो भौतिक संसाधन उपलब्ध कराए और न ही इन केंद्रों के काम को प्रोत्साहित किया। श्री राजवाडे ने कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध इस प्रदेश सरकार की रग-रग में इस क़दर समा गया है कि केंद्र सरकार की योजना को विफल करके प्रदेश सरकार केंद्र सरकार की योजना के स्थान पर धन्वंतरी दवा योजना खोलने की कोशिशों में लगी है।
एक अच्छी-भली चलती योजना को तो प्रदेश सरकार सम्हाल नहीं पा रही है और झूठा श्रेय लूटने की फ़िराक़ में नई-नई योजनाओं के नाम पर अपने पाखण्ड का शर्मनाक प्रदर्शन करने में लगी है। उन्होंने कहा कि यहां यह बताना भी सामयिक होगा कि राज्य सरकार धन्वंतरी योजना के तहत दवाई में 50 फिसद छूट देने का वादा कर रही है जबकि केंद्र द्वारा संचालित जन औषधि केंद्र में आज भी मरीजों को दवाई 70 से 80 फिसद छूट पर मिल रही है।
प्रदेश सरकार और कांग्रेस में विचारशील नेतृत्व पूरी तरह आइसोलेट हो चला है, जो अपनी कोई मौलिक जनकल्याणकारी योजना पर विचार करे और उस पर काम करे। सिवाय केंद्र सरकार को अकारण कोसते रहने की नियति के लिए अभिशप्त प्रदेश सरकार और कांग्रेस आखि़रकार केंद्र सरकार की ही योजनाओं को राजनीतिक प्रतिशोधवश बंद करने या फिर उन्हीं योजनाओं को नया नाम देकर चलाने के इस प्रदेश सरकार ने कोई काम नहीं किया है।
केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना इसका प्रमाण है, जिसे प्रदेश सरकार युनिवर्सल हेल्थ स्कीम नाम देकर चलाने का प्रयत्न की थी। राज्य कि कांग्रेस सरकार ने दावा किया था कि आयुष्मान योजना की जगह यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम से हम छत्तीसगढ़ की जनता को लाभ दिखाएं दिलाएंगे परंतु अंततः सरकार की यह योजना फेल हो गई और आज भी छत्तीसगढ़ की जनता आयुष्मान भारत योजना से लाभ प्राप्त कर रही है
केंद्र सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन के बावज़ूद प्रदेश के सरकारी और ग़ैर-सरकारी डॉक्टर्स दवाओं का फ़ार्मूला लिखकर मरीजों को नहीं दे रहे हैं। प्रदेश सरकार को जेनेरिक दवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी डॉक्टर्स को फ़ार्मूला लिखने के लिए बाध्य करना चाहिए था और इसी तरह निजी स्वास्थ्य संस्थानों व उनके डॉक्टर्स के लिए ऐसी गाइडलाइन तय करना था कि जेनेरिक दवाओं का लाभ मरीजों को मिल सके। लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश सरकार ब्रांडेड कंपनियों की महंगी दवाओं की ख़पत बढ़ाने और केंद्र सरकार की योजना को विफल करने के मिले-जुले साजिशाना एजेंडे पर काम कर मरीजों को अर्थिक चोट सहने के लिए विवश कर रही है।
पूरे प्रदेश में जनऔषधि केंद्रों का लगातार बंद होना प्रदेश सरकार के जन-स्वास्थ्य के प्रति दुराग्रह और कमीशनखोरी की तस्दीक करने के लिए पर्याप्त है। कोरोना काल में भी प्रदेश सरकार के इसी नाकारापन के चलते कोरोना पीड़ितों को दवाओं की कालाबाज़ारी और कृत्रिम संकट के चलते काफ़ी परेशानी उठानी पड़ी थी और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं ने कई लोगों को असमय मौत के मुँह में धकेला था।
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