पोल और चप्पल निर्माण से लेकर पेन बनाने तक, बैंक सखी बनकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने से लेकर माहवारी स्वच्छता जैसे विषय पर जागरूकता फैलाने तक कोरिया जिले की महिलाएं हर क्षेत्र में काम कर रही हैं। घरेलू काम में व्यस्त रहने वाली महिलाएं अब घर से बाहर निकलकर व्यवसाय का संचालन कर रही है। ये महिलाएं गौठानों में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर स्वावलंबन की मिसाल पेश करते हुए नया आयाम स्थापित कर रही है।
इसी कड़ी में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2022 के अवसर पर रायपुर में राज्य स्तरीय महिला जागृति शिविर का आयोजन किया गया जहां राज्य भर से चयनित उत्कृष्ठ महिला स्व सहायता समूह के मध्य कोरिया जिले से कोरिया मसाला गृह उद्योग स्व सहायता समूह को भी उनके उत्कृष्ट प्रयासों के लिए सम्मानित किया जा रहा है।
जिले में 53 हज़ार से ज्यादा महिलाएं बढ़ रही आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर
कोरिया जिले में 53 हज़ार से ज्यादा महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों में संलग्न होकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा चुकी हैं। आजीविका गतिविधियों से जुड़ी महिलाओं को 5 हज़ार से लेकर 15 हज़ार से अधिक तक की आय हर महीने हो रही है। नॉन फार्म, फार्म आधारित और ऑफ फार्म आधारित आजीविका गतिविधियों से जुड़कर महिलाएं सफलता की इबारत लिख रही हैं।
पोल, पेवर ब्लॉक जैसे निर्माण कार्यों से लेकर मछली पालन तक सभी में महिलाएं अव्वल
वर्मी खाद, सब्जी उत्पादन, फेंसिंग पोल, चौनलिंक फेंसिंग, मशरूम उत्पादन, मसाला उत्पादन, दोना पत्तल निर्माण, पेन निर्माण, बिहान कैंटीन, एलईडी बल्ब, फ्लाई ऐश ब्रिक्स, मिनी राइस मिल, पेवर ब्लॉक निर्माण, टेराकोटा के उत्पाद, अगरबत्ती निर्माण, जैसे फार्म आधारित और नॉन फार्म आजीविका गतिविधियों में महिलाओं ने नया मुकाम हासिल किया है।
इसी तरह ऑफ फार्म आधारित आजीविका जैसे मछली पालन, पशुपालन डेयरी, बकरी और सुअर पालन जैसे गतिविधियों में जिले की महिलाएं हाथ आजमा रही हैं।
बीसी सखी बनकर गांवों तक पहुंचाया बैंक, पेंशन, मनरेगा जैसे भुगतानों में ग्रामीणों का बनी सहारा
जिले में 130 से भी ज्यादा बीसी सखी दीदियां काम कर रही हैं। बीसी सखी के काम से महिलाएं दूर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बैंकिंग सुविधा उपलब्ध नहीं है, या बैंक बहुत दूर है, वहां बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही हैं। जिले में 340 पंचायतों को बीसी सखी दीदियां कवर करती हैं। फरवरी माह में सभी ग्राम पंचायतों में काम कर रही बीसी सखी द्वारा 9 हज़ार 341 ट्रांसक्शन किये गए हैं और लगभग 3 करोड़ रुपयों का लेन-देन किया गया है।
आज भी टैबू माने जाने वाले विषय माहवारी स्वच्छता पर गांवों में महिलाओं से कर रही खुलकर बात
आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में महावारी को लेकर महिलाएं खुलकर बात नहीं करतीं। जागरूकता के अभाव और पुरानी धारणाओं के कारण उनके स्वास्थ्य में भी इसके गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं। इन्हीं धारणाओं को तोड़ने और माहवारी स्वच्छता के प्रति ग्रामीण महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक करने के लिए स्व सहायता समूह की महिलाएं स्कूलों, महाविद्यालयों एवं घर-घर जाकर महिलाओं से इस विषय पर बात कर उनकी शंकाओं का समाधान कर रही हैं। इसके साथ ही सेनेटरी पेड का निर्माण और इसके इस्तेमाल के बारे में भी जागरूक कर रही हैं।
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