BAIKUNTHPUR @ Tahkikat News……… Develop BY ASHOK SINGH
कोरिया जिले का स्वास्थ्य महकमा ही खुद लोगों की स्वास्थ्य का दुश्मन बन गया है। अस्पताल में रोजाना निकलने वाले बायोवेस्ट के निस्तारण मिलना प्रबंधन की लापवाही उजागर ही नही कर रहा हे बल्कि यह भी बता रहा है कि बार बार कोरिया कलेक्टर की फटकार और नोटिस के बावजूद जिला अस्पताल के कुुडलि मारे बैठे लोगो की करतूत को एक बार फिर सामने ला दिया है। इससे पहले भी इसके लिए कुछ जिम्मदारो का 90 दिनो में सुधर जाने की नोटिस भी दिया गया था किन्तु लगता है कि इनका खरीदी हुई जागीरदारी हो गई है यही कारण है इन महानभावो पर अब तक कोई कार्यवाई नही हो सकी है।
मेडिकल बायोवेस्ट जलाने से वातावरण प्रदूषण का खतरा है। जिला अस्पताल में डीप बरियर पिट(बायोवेस्ट कचरा निस्तारण गड्ढा) बनाया गया है। इसके बावजूद भी अस्पताल प्रबंधन के द्वारा बायोवेस्ट को खुले परिसर में फेंका जा रहा है। यह हालात तब हैं जब अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. ए के करण को नहीं पूरा अमला खुद बायोवेस्ट को खुले में फेंकने से जनस्वास्थ्य पर होने वाले हानिकारक प्रभाव के बारे में बखूबी जानता हैं।
मृत नर्स के घर से मिली हे दवाईया
इस संबंध में कोरिया जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आर एस सिंगर का कहना है कि मैंने इसके लिए टीम का गठन कर दिया गया है यह कचरा बायोमेड वेस्ट मेडिकल कचरा नहीं या अस्पताल से निकली हुई दूसरी वेस्ट पदार्थों में है । वहीं पर उन्होंने मिली दवाई के संबंध में कहा कि यह दवा किसी मृत नर्स के घर से बरामद हुई है । जब उसके नाम से अलाट की गई क्वार्टर को तोड़ा गया तो उसमें से यह दवा निकली है । अब यह बात अपने आप में बड़ा गंभीर है कि 2016-17 की स्पाइरी दवाइयां 2013-14 में खरीदी गई थी उसके बाद यह दवा स्पाइरी होने के 5 साल उपरांत किसी मृत नर्स के बंद क्वार्टर से किस प्रकार बरामद हुआ और बरामद होने के उपरांत बगल के जिला अस्पताल में इन इस पारी दवाइयों को डिस्पोज ना करके इनका निस्तारण नगरपालिका के जिम्में क्यों छोड़ दिया गया ।
पहले जॉच हो फिर देखेंगे
वही इस संबंध में पूछने पर डॉ सेंगर ने बताया कि इसके जांच के लिए एक टीम ड्रग इंस्पेक्टर के नेतृत्व में गठन कर दिया गया है एवं इसमें जो परिणाम आएगा उसमें दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा । अब यहां आने वाले दिनों में देखना होगा इस मामले में दोषी कौन है और कार्रवाई कितने के ऊपर होती है इस बार का इंतजार बैकुंठपुर के तमाम लोगों को रहेगा ।
गिरते साख की स्वास्थ्य महकमे नही फिक्र
जानकार बता रहे हैं कि कुछ जिला अस्पताल में कुंडली मारकर बैठे कुछ कर्मचारियों की करतूत है या फिर अन्य कोई जिम्मेदार है पिछले दिनो में कोरिया के दो-तीन कलेक्टरो एवं पिछले मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी रामेश्वर शर्मा के तमाम कोशिशों के बावजूद जिला अस्पमाल के कुछ लोगो पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का ही नतीजा है कि आज एक बार फिर कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में इस तरीके का घटना सामने आया । गौरतलब हो कि डेढ़ वर्ष पूर्व कोविड के दौरान ही इस तरीके की घटना सामने आई थी जब एन एच 43 के किनारे पहाड़ियों में कई प्रकार की दवाएं फेंकी हुई पाई गई थी। जिस में भी जांच के उपरांत ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने का ही नतीजा है कि इस तरीके की घटनाओं की भयावहता एवं पुनरावृति नहीं रोकी जा सकी है । बेहतर होता कि अपने गिरती साख को लेकर स्वास्थ्य महकमे को चिंतित होना चाहिए ना की लगातार खामियों पर पर्देदारी की करने की कोशिश की जानी चाहिए।
गाइड लाइन के अनुसार हो निष्पादन
स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन के अनुसार अस्पतालों व नर्सिंग सेंटरों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को इंसीनरेटर में नष्ट किया जाता है। ऑपरेशन के बाद निकलने वाले मानव अंग के अंश, पट्टी व अन्य मटीरियल शामिल होता है। इसके लिए सागर में इंसीनरेटर प्लांट बनाया गया है। मेडिकल वेस्ट में विभिन्न बीमारियों के वायरस सहित दवाइयांे व अन्य खतरनाक चीजों के अंश होते हैं। इसलिए इसे काफी सुरक्षित तरीके से इंसीनरेटर में नष्ट किया जाता है। इससे जहरीला धुआं तो निकलता ही है, इसके साथ ही जलने के बाद जो राख निकलती है, उसे भी सुरक्षित तरीके से जमीन में दबाने का नियम है ताकि इसके संपर्क में कोई न आए।
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