01 जुलाई से देश भर लागू होगा नया आपराधिक कानून…..भारतीय दण्ड संहिता हो होगा भारतीय न्याय संहिता
देश में नए अपराधिक कानून को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। आगामी 1 जुलाई से पूरे देश में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे अपराधिक कानून को बदलकर नए कानून के हिसाब से काम किया जाएगा। इसके लिए जिले के पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है। पुलिस के सभी आला अधिकारी लगातार मीटिंग लेकर इसकी जानकारी अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को दे रहे हैं, ताकि कोई अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे तो उसे नए कानून और पुराने कानून के उलझन में फंसना ना पड़े। इतना ही नहीं पुलिस कर्मियों की इसके लिए पाठशाला भी लगाई जा रही है। तीनों नवीन कानूनों को आगामी 01 जुलाई 2024 से लागू किया जाना है। नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु इन्हें लागू किए जाने के पूर्व पुलिस विभाग के विवेचक अधिकारियों को इसका प्रशिक्षण दिए जाने हेतु पुलिस मुख्यालय रायपुर से निर्देशित किया गया है।
जिस हेतु पुलिस अधीक्षक कोरिया सूरज सिंह परिहार के निर्देश एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर के मार्गदर्शन में जिले के सभी थानो में 29 मई 2024 को उक्त नवीन कानूनों का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जिले के थाना प्रभारियों द्वारा अपने-अपने थाना में पुलिस विभाग के विभिन्न रैंक के विवेचकों को प्रशिक्षण प्रदाय किया गया है।
नए कानूनों के संबंध में संकलित जानकारी का अध्ययन करते हुए जिले के विभिन्न रैंक के कुल 25 विवेचकों को प्रशिक्षण प्रदाय किया गया है। जिसमे थाना बैकुंठपुर से 07, थाना चरचा से 06, थाना सोनहत से 05 एवं थाना पटना से 07 विवेचकों को संबंधित थाना प्रभारियों द्वारा प्रशिक्षण प्रदाय किया गया है। पुलिस अधीक्षक कोरिया ने बताया कि प्रशिक्षण का यह प्रथम चरण है, जिला स्तर पर नवीन कानूनों के सम्बन्ध में निरंतर प्रशिक्षण जारी रहेगा।
आईपीसी अब होगी भारतीय न्याय संहिता
अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे अपराधिक कानून को समय और परिस्थिति के हिसाब से बदलने के लिए देश की संसद में प्रस्ताव लाया गया है। जो आईपीसी से बदलकर भारतीय न्याय संहिता 2023 और सीआरपीसी को बदलकर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता अधिनियम 2023 समेत भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2022 की गई है। अब इसे लागू करने की तैयारी भी लगभग पूरी हो चुकी है, इसके लिए देश, प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर तक की तैयारी पुलिस के आला अधिकारियों और थानेदारों द्वारा की जा रही है।
हत्या, ठगी, दुष्कर्म, की बदलेंगी धाराएं
कानून में बदलाव के बाद पुलिस अफसर खुद को अपडेट कर सके इसके लिए बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह सभी थानेदारों को नए कानून के संबंध में पुलिस कर्मियों को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। नए कानून के लागू होने के बाद धाराएं अपराध की पहचान बन चुकी है, इसलिए इनमें भी बदलाव होगा जैसे की हत्या के लिए लगाए जाने वाली धारा 302 और धारा 101 कहलाएगी। ठगी के लिए लगाई जाने वाली धारा 420 अब 316 होगी। हत्या के प्रयास के लिए लगाए जाने वाली धारा 307 अब धारा 109 कहलाएगी। वही दुष्कर्म के लिए लगाई जाने वाली धारा 376 आप धारा 63 होगी।
जब्ती की वीडियोग्राफी का डाटा होगा एकत्रित
आधुनिकता के इस दौर में पुलिसिंग को भी स्मार्ट बनाने के लिए कानून में बहुत सारी बदलाव के साथ अपडेशन किया गया है, अपराधों के बाद बयानों और गंभीर मामलों की वीडियोग्राफी की जाएगी इसके साथ ही मालखाने में जप्ती सामान की वीडियोग्राफी कर डाटा एकत्रित किया जाएगा, जो कोर्ट की कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा प्रस्तुत की जाएगी। महिला संबंधी अपराधों को लेकर नए कानून में सख्ती और सावधानी बढ़ाई गई है। कार्रवाई के दौरान अधिक से अधिक पारदर्शिता लाने और नियमों के कड़ाई से पालन के लिए लगातार थाना स्तर से लेकर प्रदेश स्तर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारी की पाठशाला लगाई जा रही है। किसी अपराध की जांच के दौरान गलती ना हो इसके लिए विशेष रूप से हर दिन एक अपराध को लेकर उसकी गहन जानकारी देने का कार्य भी उच्चाधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।
गंभीर और टेररिस्ट मामलो में सहूलियत
बदलते समाज और उसमें घटित होने वाले अपराधों के प्रकारों में भी बदलाव हुए हैं खासकर संगठित या व्यवस्थित तरीके से अपराधों में बेतहाशा वृद्धि हुई है, कई मामलों में देखा जाता है कि, बार-बार अपराध करने के बाद अपराधी जब नया प्रक्रिया से बाहर आता है फिर इस अपराध को अंजाम देता है। फोन में मुख्य रूप से चोरी जुआ सट्टा मारपीट ऐसे कई मामले हैं जो एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार किए जाते हैं इन्हें संगठित अपराध की श्रेणी में लाया गया है। और इसे लेकर भी भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता अधिनियम में अपराधों की कार्रवाई को प्रविष्ट किया गया है। पूर्व के अपराधिक कानून में टेररिस्ट एक्टिविटी को लेकर अलग संज्ञा नहीं थी लेकिन अब नए कानून में टेरर एक्ट टेररिस्ट एक्टिविटी को लेकर विस्तृत कार्रवाई के निर्देश होंगे जिससे गंभीर मामलों और टेररिस्ट एक्टिविटी के मामलों में पुलिस को कार्रवाई के दौरान सहूलियत प्राप्त होगी।
न्याय व्यवस्था हमेशा से ही रही है सर्वाेपरि
140 करोड़ की आबादी वाले भारत में कानून व्यवस्था बनाए रखना बहुत अधिक मेहनत का कार्य है। लेकिन हमारे समाज के रक्षक और इसे शक्ति प्रदान करने वाली न्याय व्यवस्था हमेशा से ही सर्वाेपरि रही है और नए कानून के आ जाने से ऐसे अपराध जिनकी विवेचना पुराने कानून में बेहतर तरीके से नहीं थी उसमें भी प्रदर्शित और विस्तृत जानकारी के साथ पुलिस बेहतर तरीके से कार्य कर सकेगी।



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