अब खंगाली जा रही है महिला की ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी
कोरिया जिले के एक नागरिक के स्वाइन फ्लू से ग्रसित होने मौत की खबर ने जिले में सनसनी मचा दी है। जानकारी के मुताबिक स्वाइन फ्लू से संक्रमित महिला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर अपोलो हॉस्पिटल में ईलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि महिला को 4 अगस्त को कोरिया जिला अस्पताल से अपोलो रिफर किया गया था। महिला को वैंटिलेटर पर ऑक्सीजन सपोर्ट में रखा गया था, लेकिन महिला ने ईलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि कोरिया जिले के पाण्डपारा निवासी कालरीकर्मी की 51 वर्षीय पत्नी को सर्दी, खांसी के साथ तेज बुखार के लक्षण आने पर वायरल फीवर का ईलाज किया जा रहा था। ज्यादा कफ बनने और कमजोरी के कारण महिला को जिला अस्पताल लाया गया था।
महिला की ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी ली जा रही है – डॉ. सेंगर
अपोलो अस्पताल में 4 अगस्त को भर्ती कराई गई महिला में स्वाइन फ्लू के लक्षण को देखते हुए इसकी जांच की गई तो महिला स्वाइन फ्लू से पीड़ित मिली। महिला को वैंटिलेटर पर ऑक्सीजन सपोर्ट में रखा गया था। कोरिया जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.एस. सेंगर ने बताया कि महिला के मौत हो चुकी है। महिला की ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी ली जा रही है। स्वाइन फ्लू संक्रामक थी। इस कारण संपर्क में आने वालों की भी जांच की जाएगी।
लोगो को सावधानी बरतने की जरुरत-डॉ. गौतम पैकरा
वर्तमान समय सभी तरह के संक्रमण के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। जिस मौसम में मलेरिया, डेंगू तेजी से फैलता है वही पर जिला अस्पताल में पदस्त सिनियर डॉक्टर गौतम सिंह पैकरा ने बताया कि स्वाइन फ्लू और वायरल के लक्षण मिलते-जुलते है। बुखार होने पर मरीज को स्वाइन फ्लू की जांच करवानी चाहिए। ताकि समय रहते बीमारी का पता चल सकें और उसका उपचार शुरू हो सकें। उन्होंने बताया कि विभाग की तरफ से लोगों को स्वाइन फ्लू के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जहां से स्वाइन फ्लू के मरीज आ रहे हैं, वहां पर टीमें जाकर लोगों को स्वाइन फ्लू के लक्षणों के बारे में बता रही है। यह अभी भी मौसमी फ्लू वायरस के रूप में फैलता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को गंभीर संक्रमण का खतरा होता है। एक अत्यधिक संक्रामक मानव श्वसन संक्रमण है। इसके इलाज में आराम की सलाह दी जाती है। साथ ही, दर्द दूर करने वाली दवाइयां और तरल पदार्थ दिए जाते हैं। स्वाइन फ्लू वायरस स्ट्रेन के कारण होता है, जो सुअरों में शुरू हुआ है। लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, ठंड लगना, कमजोरी और शरीर में दर्द शामिल हैं। अग्रिम मामलों में बच्चों को सांस की तकलीफ, निर्जलीकरण और चिड़चिड़ापन का अनुभव हो सकता है।

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