बैकुंठपुर में संघ ने शताब्दी वर्ष पर किया शस्त्र पूजन…..कार्यकर्ताओ ने बताया संघ का महत्व

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बैकुंठपुर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बैकुंठपुर में गुरुवार को विजयदशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में किया गया। इसमें स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्य वक्ता सिद्ध विनायक पांडे एवं महलपारा बस्ती प्रमुख रवि कांत गुप्ता ने बताया कि हिन्दु समाज में पौरुष तथा शक्ति का जागरण विजयादशमी के पावन पर्व पर होता है। इस पवित्र पर्व पर अपने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारंभ होकर 100 वर्ष पूर्ण हो रहे है। विश्व शाति और मानव कल्याण का उद्देश्य लेकर सदियों से हिंदु समाज की चल रही प्रदीर्घ यात्रा का ही यह सांप्रत रूप है।

बताया गया कि बैकुंठपुर में संघ का पथ संचलन 05 अक्टूबर रविवार को स्वामी आत्मानंद स्कूल महलपारा किया जायेगा। रवि गुप्ता ने बताया कि भारत भूमि को माता मानने वाला एकमात्र हिंदू समाज है, इसलिए हिंदुत्व ही देश की मूल आत्मा है। उन्होंने जोर दिया कि यदि मूल को सशक्त किया जाए तो राष्ट्र स्वतः सशक्त हो जाएगा। डॉ. हेडगेवार ने इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी, जिसका मुख्य लक्ष्य व्यक्ति निर्माण है, ताकि सशक्त और संस्कारित व्यक्ति से मजबूत समाज और राष्ट्र का निर्माण हो सके। इस दौरान स्वयंसेवकों ने देशभक्ति और सनातन संस्कृति से जुड़े गीत प्रस्तुत किए और बौद्धिक विचारों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का संदेश दिया। राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ के 100 साल पूरे होने पर स्वयंसेवकों ने एक दूसरे को बधाई देते हुए कहा कि विजयादशमी के महापर्व पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हजारों वर्षों से चली आ उस परंपरा का पुनर्स्थापन था।

संघ कार्यकर्ता रेवा यादव ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष जैसा महान अवसर देखने को मिल रहा है। मैं इस अवसर पर राष्ट्रसेवा के संकल्प को समर्पित कोटि-कोटि स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देता हूं। मैं संघ के संस्थापक और हम सभी के आदर्श परम-पूज्य डॉक्टर हेडगेवार के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। इन्हीं स्तंभों पर खड़े होकर संघ ने लाखों स्वयंसेवकों को गढ़ा, जो विभिन्न क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ा रहे हैं।

संघ कार्यकर्ता देवेन्द्र तिवारी ने संघ के उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए कहा-अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र-निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चला। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संघ की शाखाएं, व्यक्ति-निर्माण की यज्ञ-वेदी हैं। राष्ट्र-निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति-निर्माण का स्पष्ट पथ और शाखा जैसी सरल, जीवंत कार्यपद्धति संघ की सौ वर्षों की यात्रा के आधार बने।

संघ कार्यकर्ता रवि गुप्ता ने कहा कि संघ जब से अस्तित्व में आया उसके अंदर राष्ट्र प्रथम का भाव रहा। आजादी की लड़ाई के समय डॉ. हेडगेवार समेत अनेक कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया। आजादी के बाद भी संघ निरंतर राष्ट्र साधना में लगा रहा। संघ को कुचलने के प्रयास भी हुए लेकिन संघ के स्वयंसेवकों ने कभी कटुता को स्थान नहीं दिया। वे जानते हैं कि समाज हमसे अलग नहीं है, समाज हमसे ही बना है।

संघ कार्यकर्ता दिनेश राजवाडे ने कहा कि 100 साल की यात्रा में संघ ने हममें आत्मबोध, स्वाभिमान जगाया है। संघ उन इलाकों में भी काम करता है जहां पहुंचना सबसे कठिन है। आदिवासी परंपराओं और मूल्यों को सहेजने और में भी संघ अपना सहयोग देता रहा है। स्थापना आज तक संघ की हर विभूति ने भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई।

संघ कार्यकर्ता अनिल खटिक ने कहा कि जब सौ साल पहले संघ अस्तित्व में आया था, तो उस समय की आवश्यकताएं और थीं, संघर्ष कुछ और थे। लेकिन आज सौ वर्षों बाद जब भारत विकसित होने की तरफ बढ़ रहा है, तब आज की चुनौतियां अलग हैं, संघर्ष अलग हैं। मुझे खुशी है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी इन चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस रोडमैप बनाया है।

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