परिवारवाद और वैचारिक कंगाली में घिरी डेढसौ साल पुरानी कांग्रेस-भईयालाल

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बैकुंठपुर।

भाजपा विधायक भईयालाल राजवाडे ने लगभग डेढसौ साल पुरानी कांग्रेस के संगठन पर तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी अब बदलाव के लिए मजबूर हो गई है। यह वैचारिक और संगठनात्मक संकट की बड़ी मिसाल है। श्री राजवाडे ने कहा कि कांग्रेस नेता केवल एक परिवार के चरण छूने में व्यस्त रहे, लेकिन कभी अपने कार्यकर्ताओं के मन को नहीं छू पाए।

भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि कांग्रेस का नेतृत्व लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार करके परिवारवाद की मानसिकता में फंसा हुआ है। यही वजह है कि कांग्रेस आज दयनीय स्थिति में है। छत्तीसगढ़ में जिला अध्यक्षों एवं मंडल के संगठन की नियुक्ति अब दिल्ली हाईकमान द्वारा तय की जा रही है और ऑब्जर्वर भेजे गये हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं के विश्वास को बनाए रखने में असफल रहा।

उन्होने कहा कि कांग्रेस में गुटीय संघर्ष ने राजनीतिक आपदा का रूप ले लिया है। कांग्रेस हाईकमान को आदिवासी नेतृत्व पर भरोसा नहीं है, इसलिए उन्हें फ्री हैंड नहीं दिया गया और सीधे दिल्ली से ऑब्जर्वर भेजने पड़े। इस स्थिति ने कार्यकर्ताओं में हताशा और निराशा पैदा कर दी है। 2014 के बाद से कांग्रेस धीरे-धीरे केवल कुछ राज्यों तक सीमित होती जा रही है।

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