बैकुंठपुर समेत आसपास की सडको पर यातायात नियमों ठेंगा दिखा रहे नाबालिग

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बैकुंठपुर।

बैकुंठपुर में यूं तो हर दिन सघन ट्रैफिक के कारण आवागमन बदहाल रहता है, जिसे दुरुस्त करने के लिए यातायात पुलिस ने विगत महिनो से जद्दोजहद करना ही छोड दिया है। सडक पर आवागमन करने वाले लोग को सड़क दुघर्टना का शिकार होने के भय के माहौल बना रखा हैं। इन नाबालिग बाइक चालकों से सडक पर चलने वाले अन्य लोगो के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है, वहीं कुछ चालक जांच में पकड़ाते हैं। बावजूद इसके उन पर कोई असर नहीं होता है। वही नए मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद यातायात विभाग की कार्रवाई न के बराबर हो गई है।

इस दौरान नाबालिग न केवल आवागमन में परेशानी पैदा कर रहे हैं बल्कि खुद भी जान जोखिम डालने के साथ साथ राहगीरो के जीवन के लिए यमराज बने जा रहे हैं। खासतौर से स्कूली बच्चों को दुपहिया वाहन दौड़ाते हुए देखा जा सकता है। नियम मुताबिक निर्घारित आयु पूरी किए बगैर वाहन चलाने की अनुमति नही है। किन्तु जब जिम्मेदारो के ऑख के सामने हर रोज यह नजारा गुजरता हो उस पर कोई कार्यवाई नही की जा रही हो इसके आगे क्या कहा जा सकता है।

परिजन भी कम जिम्मेदार नहीं

बच्चों को वाहन देने वाले उनके परिजन भी कम जिम्मेदार नहीं है। अभिभावक उनको कार और बाइक की चाभी सौंप देते हैं। बच्चों के हाथ में वाहन आते ही वे फर्राटे भरने लगते हैं। रफ्तार देख लोग भौचक्के रह जाते हैं। देखा जाए तो नाबालिको की यह रफ्तार कई बडी सड़क दुर्घटना का कारण बन रही है। फिर भी पालको द्वारा बेफिक्र होकर नाबालिको के हाथ में वाहनो का चाभी थमा रहे है। देखा जाता है कि नाबालिको के कई गैंग द्वारा शहर की विभिन्न सडको को रेस कोर्ट की तरह इस्तेमाल करते है इससे इन मार्गो में आवागमन करने वाले लोगो में अपने जीवन को लेकर भय का वातावरण बना रहता हैं।

लडकिया भी नही दौड़ में पीछे

बैकुंठपुर शहर सहित आसपास में नाबालिग छोरीया भी छोरो से कम नही है जिसमे स्कूल, कोचिंग जाने के लिए बालिकाएं फर्राटे से हवा में दौड़ाते हुए स्कूटी का चालन कर रहे है। जिन्हें देखकर राहगीर भी भौंचक हो जाते है। यहां यह बताना भी लाजमी होगा कि पूर्व के वर्षो में स्कूल व कोचिंग संस्थान के पास लगातार पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाती थी लेकिन जब से नए कानून को अमलीजामा पहनाया गया है तब से कार्रवाई शहर की सड़कों से गायब हो गई है।

ये है नियम

परिवहन विभाग के मुताबिक 16 साल या इससे ऊपर के बच्चों का ही वाहन का लाइसेंस बनाया जाता है। यह लाइसेंस भी 50 सीसी इंजन तक का बनता है। यानि बच्चो मोपेड ही चला सकते है। बिना लाइसेंस के वाहन चलाना गलत है। 18 साल की उम्र होने पर ही दुपहिया या चौपहिया वाहन का लाइसेंस बनाया जा सकता है। नाबालिग के बिना लाइसेंस के पकड़े जाने पर यातायात पुलिस 1500 रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

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