तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ विकासखण्ड के ग्राम रोझी के रहने वाले किसान गणेष प्रसाद ने अपने 1 हेक्टेयर भूमि पर उड़द उडद माश का प्रदर्षन आयोजित किया। उन्होंने बताया कि मुझे कषि विभाग के द्वारा 20 किग्रा. बीज एवं अन्य सामग्री प्राप्त हुई । मैं पहले पुरानी पद्धति से कृषि कार्य करता था। अब कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के मार्गदर्षन से मैं अपनी पूरी खेती आधुनिक व उन्नत तकनीकी से कर रहा हूॅ। मैनें गत वर्ष की छिडकाव पद्धति से बोनी की थी इस वर्ष कतार मे एवं फेरोमेन टेप प्रकाष प्रपंच का उपयोग किया जिससे कीट नियंत्रण में होने वाले खर्च में बचत हुई एवं फसल जिसमें गत वर्ष के उत्पादन 6.50 क्विं. प्रति हेक्ट. की तुलना में 7.88 क्विं. प्रति हेक्ट. इस वर्ष उत्पादन लिया, जो गत वर्ष की तुलना में 1.38 क्विं. अधिक है। गत वर्ष की आय की तुलना में इस बार मुझे आय में भी अधिक लाभ हुआ है।

इसी तरह बैकुंठपुर विकासखण्ड के ग्राम नरकेली के रहने वाले किसानकृश्णा देवी ने अपने 1 हेक्टेयर भूमि पर कतार रोपा के माध्यम से कृशि की नई तकनीक और उच्च किस्म के बीजों का प्रयोग कर कृषि उत्पादन में वृद्धि करने में सफलता हासिल की है और इस काम में उन्हें कृषि विभाग से मदद मिली। उन्होंने बताया कि मेरे पास कृषि योग्य भूमि 2 हेक्ट. है। जिसमें से मैंने 1हेक्टेयर रकबे में धान आर.पी.बायो-226 का कतार रोपा प्रदर्षन लगाया। बीज 60 किग्रा. एवं अन्य प्रदर्षन की सामग्री कृषि विभाग के माध्यम से प्राप्त की व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की सलाहनुसार उन्नत तकनीकी से प्रदर्षन आयोजित किया पहले मैं पुरानी पद्धति से खेती का कार्य करती थी। इससे ज्यादा लाभ नहीं लेे पाती थी। इस बार गत वर्ष की धान का पैदावार 27 क्विं. प्रति हेक्ट. की तुलना में 46 क्विं. उत्पादन प्राप्त किया, जो 19 क्विं. अधिक है। गतवर्ष की आय 48600 की तुलना में 82800 प्राप्त की जो गत वर्ष से 34200 अधिक है।
शासकीय सहयोग से उड़द और कतार रोपा कर सामान्य विधि से बोई गई फसल की तुलना में किसानों को अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ है। किसान बताते हैं कि कृषि विभाग से सहयोग प्राप्त कर उन्होंने समन्वित खेती प्रयोग में उन्नत किस्म के उड़द और कतार रोपा की खेती की। कृषिगत नीतियों एवं योजनाओं की जानकारी से कम लागत में अधिक उत्पादन कर उनकी आय में वृद्धि हुई है। इससे अब वे अपने परिवार की खुशहाली और जरूरतें पूरी करने में सक्षम हुए हैं।
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