करंट से मौत के बाद कार्यवाही के लिए भटक रहा आदिवासी परिवार … गर्भवती पत्नी व दो मासूम का जीवन हुआ अंधकारमय …

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तहकीकात न्यूज  @  सुरजीत सिंह रैना . मनेन्द्रगढ

डेढ बरस के मासूम की आंखे आज भी पिता को खोजती रहती हैं लेकिन इस मासूम को क्या मालूम कि उसका पिता किसी स्वार्थी रसूखदार के स्वार्थ की वजह से इस दुनिया से ही अलविदा हो गया। इस मासूम के जरा सा रोने पर घर में रहने के दौरान पिता दौडकर इसे गोदी पर लेकर घूमते रहता था लेकिन अब अपने आसपास पिता के नही दिखने पर मासूम बेचैन हो जाता है। मासूम की आंखे पिता को आज भी लगातार खोजती रहती हैं लेकिन मासूम को यह नही पाता कि उसका पिता सिस्टम की भेंट चढ़ गया है।
ज्ञात हो कि आज से लगभग बीस दिन पूर्व बांध पारा ग्राम पंचायत बरकेला में निवास करने वाले देवनारायण पोया की मौत मजदूरी का कार्य करने के दौरान बिजली के नंगे तारों के करंट लगने से हुई थी। इस प्रकरण में जांच व कार्यवाही के लिए मृतक देवनारायण के पिता द्वारा न्याय मिलने की आस में बारम्बार पुलिस थाने का चक्कर लगाने के बावजूद उसे निराशा ही हाथ लग रही है।

रसूखदार से जुडा मामला
आदिवासी गरीब का बारम्बार थाने का चक्कर लगाने के बावजूद निराशा हाथ का लगना यथार्थ में यही संकेत देता है कि रसूखदार बहुत हराभरा प्राणी है और आदिवासी गरीब असहाय है। अब पूरे परिवार का पेट भरने के लिए शहर आकर दूध बेचने वाले इस असहाय आदिवासी का चिंता करना उस समय वाजिब लगता है जब दिहाडी मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाले मृतक देवनारायण के नही रहने पर गरीब परिवार रसूखदार के दांवपेंच का सामना कैसे करेगा।

मासूम की आंखें पिता को आज भी खोज रहीं

मृतक की मां बताती है कि इस मासूम के जरा रोने पर मेरा बेटा देवनारायण घर पर रहने के दौरान बच्चे को गोदी में लेकर घूमते रहता था लेकिन अब अपने आसपास नही दिखने पर मासूम की आंखे लगातार पिता को खोजते रहती हैं और वह बेचैन हो जाता है।

मां- बाप का इकलौता बेटा था मृतक

अपने एक ही जवान औलाद के असमय मृत्यु पर बिलखते हुए मृतक की मां का बार-बार यही कहना था कि हादसा होने के बाद पास के ही हास्पिटल नही ले जाकर बैकुंठपुर क्यों ले जाया गया ? इसी वजह से उसके बेटे की मृत्यु हो गई। यदि पास के हास्पिटल ले जाते तो हम भी पहुंचकर देखभाल कर लेते। आखिर किस बात का डर था कि हादसे को छुपाने का काम किया गया। जिसमें मेरे बेटे की जान चली गई।

दो मासूम व गर्भवती पत्नी का छिन गया अपना सहारा
बरकेला निवासी देवनारायण के मृतक हो जाने के बाद उसके दो मासूम बच्चों के सर से बाप का साया उठ गया और गर्भवती पत्नी विधवा हो गई। गर ये हादसा है तो जिस जगह मृतक दिहाडी मजदूर के साथ हादसा हुआ। हादसे के बाद किस निजी स्वार्थ को छिपाने की खिचड़ी पक रही है कि मृतक के पिता को थाने से निराशा हाथ लग रही है। आज बाप के साये से महरूम हो चुके ये दो मासूमों बच्चे और गर्भवती पत्नी क्या इंसाफ और मुआवजे के हकदार नही है !

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