तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
लाॅकडाउन में सब्जीयो के दाम पहले से ही कम थे वही पर इन दिनों लगातार दूसरे साल सब्जियों के उत्पादक किसानों पर मौसम की मार पड़ी है। सामान्य गर्मी के सीजन फरवरी महीने में बारिश से बेमौसमी सब्जियों की मुख्य फसल टमाटर की खेती करने वाले किसानों पर अब इंद्रदेव से ही लाल-पीले होने लगे हैं। इलाके के ग्रामीण लोग न केवल नई फसल की तैयारी कर पा रहे हैं, बल्कि उनकी पहले से लगी भिन्न-भिन्न सब्जियों की पैदावर भी पिछले 4 दिनो से बेवक्त हो रही बारिश से चैपट होने के कगार पर है।
जिला मुख्यालय बैकुंठपुर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में टमाटर उत्पादन किसानों की आर्थिक का मुख्य व्यवसाय है, जो यहां सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र में पैदा किया जाता है, जबकि टमाटर, मिर्च, गोभी, बैंगन व कद्दू वर्गीय सब्जियां भी बहुतायात में उगाई जाती है। अब जबकि मौसम निष्ठुर बना है तो यहां किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें भी और गाढ़ी होती जा रही है। क्षेत्र में हो रही बारिश से एक ओर जहां किसानों की नई फसलों की रोपाई नहीं हो पा रही है, वहीं पर खेतों में खड़ी नकदी फसलों के तबाह होने से भारी आर्थिक संकट खड़ी कर दी है।
महंगी दवाएं भी हो रही बेअसर
झुलसा रोग आने के बाद किसान बचाव के लिए निजी दुकानों से महंगी दवाएं खरीद कर स्प्रे कर रहे हैं, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं मिल रहा है। किसानों का कहना है कि प्रति हेक्टेयर एक बार दवा का छिड़काव करने पर दो से 5 हजार का खर्चा आता है, लेकिन फिर भी टमाटर की फसल को बचा पाना मुश्किल है।
टमाटर क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल
जिले में टमाटर की पैदावार अच्छी होती है। ऐेसे में किसान टमाटर की फसल की ओर आकर्षित हो रहे है। अब टमाटर की फसल बर्बाद होने के कगार पर है और किसानों को कोई आर्थिक सहायता मिलने की संभावना भी नहीं है। अेसे में किसान को फसल बर्बाद होने पर रोटी के लाले पड़ सकते हैं। क्षेत्र में टमाटर की फसल अच्छी होने से किसानों का रुझान टमाटर की फसल की ओर जा रहा है। इसकी कीमत काफी महंगी होती है। वर्तमान में देसी किस्मों को काम में नहीं लेकर अच्छे उत्पादन के लिए किसान हाईब्रिड टमाटर की किस्मों के बीज खरीदते हैं।
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