तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . रायपुर
छत्तीसगढ़ में जबसे कांग्रेस की सरकार सत्ता में आयी है, दलितों/आदिवासियों समेत समाज के हर वर्ग के खिलाफ संगीन अपराध की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है. ऐसे कुछ मामलों में कांग्रेस के नेताओं की संलिप्तता भी आपने लगातार देखा ही है.
प्रदेश में हर तरह के माफियाओं को हौसले ऐसे बुलंद हैं कि वे जन-प्रतिनिधियों/पत्रकारों तक के साथ बर्बरता करने से बाज़ नहीं आ रहे. हाल में आपने रेत माफिया द्वारा भाजपा समर्थित आदिवासी जन प्रतिनिधि की बर्बर पिटाई और उसके अपराधी माफिया को कांगेसी संरक्षण, बिना किसी बीमारी के मेकाहारा में अपराधी की मेज़बानी आदि का मामला देखा ही. कांग्रेस के ही गुंडों द्वारा पत्रकार बंधुओं के साथ कैसी बर्बरता कांकेर में की गयी, वह भी आपने देखा. ऐसी तमाम घटनाएं लगातार हो रही है और कांग्रेस सरकार न केवल हाथ पर हाथ धरे बैठी है बल्कि तमाम अपराधों में भागीदार भी है कांग्रेस.
खास कर आदिवासी-दलित वर्ग की महिलाओं के साथ जिस तरह की घटनाएं हो रही है, उसने प्रदेश का सर शर्म से झुका दिया है. प्रदेश सरकार का, जिन पर न केवल छत्तीसगढ़ के क़ानून व्यवस्था को बनाये रखने की जिम्मेदारी है, उनका रुख कैसा है इन मामलों पर यह भी आपने मंत्री शिव डहरिया के बयान में देखा ही. उनके हिसाब से यहां ‘छोटे बलात्कार’ हो रहे हैं. न तो इस बयान पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने और न ही स्वयं मंत्री ने माफी तक मांगना भी मुनासिब नहीं समझा. मंत्री को दंड देना तो दूर की बात है.
अभी एक सबसे दर्दनाक घटना केशकाल से सामने आई है. वहां दुष्कर्म की शिकार नाबालिग आदिवासी किशोरी न केवल 7-7 दोषियों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई बल्कि कहीं से न्याय नहीं मिलने पर उसने आत्महत्या भी कर ली. फिर भी मामले को दबाने की भरसक कोशिश की गयी. अंत में आजिज़ आ कर किशोरी के पिता ने भी आत्महत्या की कोशिश की, तब मामला बाहर आ पाया है.
लगातार ऐसी घटनाएं होना और उसकी रिपोर्ट तक नहीं लिखाने के पीछे सरकार का यह अलिखित आदेश है कि ऐसी कोई घटना दर्ज न किये जायें. ऐसा इसलिए क्योंकि राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकड़े में प्रदेश में अपराधों की संख्या में लगातार वृद्धि का खुलासा हो रहा है. ऐसे में अपराध कम करने, दोषियों के खिलाफ कारवाई करने से अधिक ध्यान सरकार का मामले को छिपाने पर है, यह स्पष्ट दिख रहा है.
खबर के अनुसार किशोरी आत्महत्या की खबर से उस गांव में एक बैठक किया गया और उस घटना में शामिल आरोपियों को थाना में बुलाकर 15/15 हजार रुपया आरोपियों से लेने की बातें सामने आ रही है. कहते हुए अपार कष्ट हो रहा है कि इस सरकार में प्रदेश के माताओं-बहनों के सम्मान और प्राण की यही कीमत रह गयी है. पीड़ित पक्ष ने दूसरे दिन ही थाने में अपराध पंजीबध्द कराने की बात कही है लेकिन किसके दबाव में एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुई क्यों पीड़ित के पिता को दो महीने से पुलिस थाने के चक्कर लगाने पड़े
इससे पहले प्रदेश के धरमजयगढ़ में कांग्रेस नेता और पूर्व जनपद सदस्य, कोल माफिया अमृत तिर्की द्वारा किये दुष्कर्म की बात हो, सुकमा, रायगढ़, बलरामपुर आदि की नृशंस घटना हो. किसी भी मामले में शासन के किसी जिम्मेदार व्यक्ति के कान पर जूं नहीं रेंगी है. बलरामपुर की खबर देख कर तो रोंगटे खड़े हो जायें किसी के भी, वहां 9 माह के भीतर 104 केस सामने आये हैं जिनमें 79 तो केवल नाबालिगों के खिलाफ अपराध दर्ज हुए हैं. मतलब बलरामपुर जिले में ही तीन में लगभग एक रेप की घटना हो रही है।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में इस तरह अपराधों में बेतहाशा वृद्धि होना और उस पर कारवाई या बयान तो दूर, इसे उत्तर प्रदेश की घटना के मुकाबले कैबिनेट के मंत्री द्वारा ‘छोटा’ बताया जाना कितना दुर्भाग्यजनक है, यह समझा जा सकता है. समूची कांग्रेस देश भर में किस तरह ‘हाथरस’ के नाम पर उकसाने में लगा है, यह एक स्टिंग में सामने आया ही. दुःख यह है कि इन तमाम घटनाओं पर मूंह मोड़ते हुए केवल राहुल-सोनिया की कहने का शिकार होने में छत्तीसगढ़ के सीएम लगे हैं, ऐसा घिनौना मामला और कुछ नहीं हो सकता.
भाजपा यह मांग करती है कि :-
- जबसे कांग्रेस की सरकार सत्ता में आयी है तबसे दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों और अन्य सभी वर्गों के खिलाफ हुए तमाम संज्ञेय अपराधों पर श्वेत पत्र जारी करे. वह बताये कि तमाम घटनाओं पर क्या कारवाई की उसने.
- केशकाल की घटना पर न्यायिक आयोग का गठन करे. इसके अलावा रेप की सभी घटनाओं की न्यायिक जांच के लिए अलग से आयोग का गठन करे. सभी दोषियों पर फास्ट ट्रैक अदालत में मुकदमा चले.
- पीड़ित परिवारों को समुचित मुआवजा और उनके परिवार को नौकरी दी जाय.
- दोषी अधिकारियों/पुलिसकर्मियों को दण्डित किये जायें. उन्हें बर्खास्त कर उनके खिलाफ मुकदमा चले.

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