लाइसेंस ख़त्म होने और जाँच के दायरे में होने के बाद भी कंपनी से ज़िंक सल्फेट की आपूर्ति किसान विरोधी चरित्र का उदाहरण : भाजपा

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प्रदेश सरकार की नाक के नीचे अफ़सरशाही ने बीज निगम को चारागाह बना रखा है और किसान आत्महत्या के लिए विवश हो रहे हैं!

प्रदेश सरकार इस मामले में उदासीनता बरतने और किसानों को आत्महत्या करने की सीमा तक हताश और संत्रस्त करने की दोषी : संजय

तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क .  रायपुर

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने लगभग सालभर पहले लाइसेंस की वैधता समाप्ति के बाद भी कंपनी द्वारा बीज निगम में ज़िंक सल्फेट की आपूर्ति करने और इसमें हुए 25 लाख रुपए के घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार के किसान विरोधी चरित्र का यह सबसे शर्मनाक उदाहरण है। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश सरकार की नाक के नीचे अफ़सरशाही ने बीज निगम को अपना चारागाह बना रखा है और अन्नदाता किसान आत्महत्या के लिए विवश हो रहे हैं।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री श्रीवास्तव ने इस बात पर हैरत जताई कि जिस कंपनी के लाइसेंस की वैधता 31 दिसंबर, 2019 को समाप्त हो गई थी, उसे अनदेखा कर बीज निगम के अधिकारी ने उक्त कंपनी को 03 हज़ार किलोग्राम से भी ज़्यादा ज़िंक सल्फेट की आपूर्ति का आदेश दे दिया। अभी अगस्त और सितंबर माह में भी उसी कंपनी ने भारी मात्रा में लाखों रुपए मूल्य के ज़िंक सल्फेट की आपूर्ति दुर्ग समेत कई अन्य ज़िलों में की है। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि उक्त कंपनी के ख़िलाफ़ दुर्ग ज़िले के कृषि विभाग के तत्कालीन उप संचालक ने जाँच प्रतिवेदन तैयार कर दुर्ग बीज निगम को इस मामले में जाँच के लिए कहा था, लेकिन बावज़ूद इसके उक्त कंपनी को ज़िंक सल्फेट और अन्य कीटनाशकों की आपूर्ति के ऑर्डर किस आधार पर दिए जाते रहे? बाद में इस मामले के प्रकाश में आने की भनक लगने के बाद अब जाकर इसी अक्टूबर माह में कंपनी ने कृषि निदेशक के कार्यालय में अपने लाइसेंस की वैधता अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन जमा कराया है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री श्रीवास्तव ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए प्रदेश सरकार पर इस मामले में उदासीनता बरतने और प्रदेश के अन्नदाता किसानों को आत्महत्या करने की सीमा तक हताश और संत्रस्त करने का दोषी बताया। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और कृषि मंत्री अपने ही गृह ज़िले में चल रहे भ्रष्टाचार के इस शर्मनाक खेल की ओर से आँखें मूंदे बैठे रहे और किसान ग़ैर लाइसेंसी व जाँच के दायरे में आई हुई कंपनी के कीटनाशक उपयोग करके लुटते रहे, ठगे जाते रहे और हताश व निराश होकर हाल ही एक युवा किसान ने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली। यह समूचा मामला भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कांग्रेस और उसकी प्रदेश सरकार के पीटे जा रहे ढोल की पोल बता रहा है। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि जिस ज़िले से मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और कृषि मंत्री सीधा ताल्लुक़ात रखते हैं, वहाँ भ्रष्टाचार का यह खेल किसानों की जान का दुश्मन बन गया है और प्रदेश सरकार चुप्पी साधे बैठी है जो उसके घोर किसान विरोधी चरित्र पर मुहर लगाने के लिए पर्याप्त है। इस मामले की जाँच करा दोषियों को दंडित किया जाए।

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