तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
कोरिया जिले के 33 धान खरीदी केंद्रों में आज से विधिवत धान खरीदी का कार्य प्रारंभ हो गया । किंतु देखने में आ रहा है कि कई धान खरीदी केंद्रों में आज बोहनी तक नहीं हुई और ना ही किसान अपनी धान बेचने के लिए टोकन कटाया। ऐसा ही एक धान खरीदी केंद्र जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर के छिदडाढ का रहा जहां पर पंजीकृत 780 किसानों में से अब तक धान बेचने हेतु टोकन कटाने के लिए एक भी किसान नहीं पहुंचे । वहीं पर जिले के अधिकांश धान खरीदी केंद्रों में कांग्रेस के बड़े नेताओं और विधायकों के द्वारा विधिवत पूजा अर्चना के साथ धान खरीदी का कार्य प्रारंभ किया गया। इस दौरान प्रदेश के खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने बातचीत के दौरान बताया कि कोरिया जिले समेत संभाग के सभी जिलों अलर्ट कर दिया गया है कि किसी प्रकार से बाहरी धान को किसी भी समिति या खरीदी केंद्र में खपाने का प्रयास ना किया जाए । इस दौरान यदि किसी भी खरीदी केंद्र प्रभारी के संबंध में ऐसी गड़बड़ी सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी । वहीं खाद्य मंत्री ने बताया कि जिले से लगने वाली दूसरे प्रदेशों की सीमाएं सील करने के आदेश दे दिए गए है। इस संबंध में जिले के कलेक्टर को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे मध्यप्रदेश एवं अन्य प्रदेशों से लगने वाली सीमा पूरी तरीके से चैकसी कड़ी कर दें।
अब 24 घण्टे टोकन काटने होंगे
धान खरीदी के दौरान अव्यवस्था न हो और किसानों को परेशान न होना पड़े इसके लिए राज्य शासन ने खरीदी केंद्र प्रभारियों को 24 घंटे टोकन की वितरण करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कलेक्टर को मानिटरिंग करने भी कहा गया है। दरअसल पहले खरीदी केंद्र प्रभारियों को सुबह 9.30 से शाम 5.30 बजे तक टोकन वितरण करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अब किसानों को दिक्कत न हो इसलिए टोकन को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। जिला सहकारी बैंक के अधिकारीयो ने बताया कि राज्य शासन के निर्देश पर धान खरीदी केंद्रों में टोकन का वितरण को लेकर नई व्यवस्था की गई है। इसके तहत केंद्र प्रभारियों को 24 घंटे टोकन वितरण करने के निर्देश दिए हैं।

कोचिया और बिचैलियों फिर सक्रिय
समर्थन मूल्य को लेकर शासन ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। इसके तहत शासन की नजर इस बार भी कोचिया और बिचैलियों पर है। लिहाजा जिले में उड़नदस्ता दल गठित की गई है। दरअसल बताया जा रहा है कि बिचैलिया और कोचिया पटना, और छिदिया सरभोका समेत अधिकांष क्षेत्रो में किसानों से संपर्क कर रहे हैं जो अपने हिस्से का पूरा धान बेचने के बाद भी उनके खाते में धान खपाने की गुंजाइश बना रहे है। इसके लिए कमिष्न के तौर पर किसानो को राषी भी दी जा रही है। बताया जा रहा है कि बिचैलिए और किसानों के बीच समझौता भी दिलचस्प होता है। अपने खाते में धान बेचने के एवज में किसान को बोनस की राशि दी जाती है। समर्थन मूल्य की राशि बैंक खाते से निकालकर किसान कोचिया को दे देते हैं। बोनस की राशि अपने पास रख लेते हैं। जबकि अधिकारियो किसान इस बार ऐसे करते पाए गए तो उनको ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा। अगले वर्ष धान बेचने पर रोक लगा दी जाएगी। साथ ही समिति के कर्मचारी के विरु्ध विभागीय कार्रवाई की भी जाएगी।
खरीद में देरी का ळाभ बिचैलियों को
देखने में आ रहा है कि जिले में बहुत से किसान ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी समितियो में धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है, लेकिन पैसे की जरूरत की वजह से अपना धान खुले बाजार में 12 सौ से 13 रुपये क्विंटल के भाव पहले ही बेच चुके हैं। इसी तरह अच्छे किस्म का धान उत्पादन करने वाले बड़े किसान भी पंजीयन तो कराते हैं परंतु खुले बाजार में कीमत कहीं अच्छी मिलने के कारण सरकारी मंडी में नहीं बेचते हैं। बिचैलिये ऐसे ही किसानों के पंजीयन पर अपना धान सरकारी मंडी में खपा देते हैं।
धान की सबसे ज्यादा कीमत
छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को धान के लिए प्रति क्विंटल 2500 रुपये का भुगतान करती है। यह देश में सर्वाधिक है। यह राशि दो हिस्सों में मिलती है। केंद्र से घोषित समर्थन मूल्य का भुगतान तुरंत कर दिया जाता है। बाकी अंतर की राशि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किस्तों में दी जाती है।
गड़बड़ी रोकने गिरदावरी और रकबे पर सख्ती
धान खरीदी में गड़बड़ी की आशंका सरकार को भी है। यही वजह है कि सरकार इस वर्ष धान के रकबे और गिरदावरी रिपोर्ट को लेकर सख्त है। पटवारियों को गिरदावरी रिपोर्ट के साथ फोटो भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह खेती के रकबे में केवल उतने हिस्से को ही शामिल किया गया है, जिनते में बुआई हुई है। छत्तीसगढ़ सरकार देश में सबसे ज्यादा कीमत पर किसानों से धान खरीदती है। राज्य सरकार अपने राज्य के किसानों हित में यह कर रही है। दूसरे राज्यों से बिचैलियों के माध्यम से आने वाले धान को रोकने के लिए सीमाओं पर सख्त जांच के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के किसानों का हक न मारा जाए, इसके लिए गिरदावारी से लेकर पंजीयन और खरीदी व्यवस्था में कई सुधार किए गए हैं।
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